निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए वरिष्ठ नागरिक और अति वरिष्ठ नागरिक के लिए लागू विवरणी और फ़ॉर्म
निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए वरिष्ठ नागरिकों और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए लागू विवरणी और फॉर्म
अस्वीकरण: इस पृष्ठ पर उपलब्ध सामग्री केवल एक केवल एक अवलोकन और सामान्य मार्गदर्शन देने के लिए है और यह संपूर्ण नहीं है।
कृपया पूर्ण विवरण और दिशा-निर्देशों के लिए, आयकर अधिनियम, 1961, फॉर्म, नियम और अधिसूचनाएँ देखें।
एक व्यक्ति जो भारत का निवासी है, तथा जिसकी आयु पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय 60 वर्ष या उससे अधिक हो, परंतु 80 वर्ष से कम हो, वह आयकर प्रयोजनों के लिए वरिष्ठ नागरिक माना जाता है। अति-वरिष्ठ नागरिक वह व्यक्ति (निवासी) होता है, जिसकी आयु पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय 80 वर्ष या उससे अधिक हो।
यह विवरणी निवासी ( साधारणतया निवासी नहीं के अलावा) उस व्यक्ति के लिए लागू होता है, जिसकी कुल आय निम्नलिखित स्रोतों से ₹ 50 लाख तक है।
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वेतन / पेंशन |
एक गृह संपत्ति |
अन्य स्रोत (ब्याज, परिवार की पेंशन, लाभांश आदि) |
₹ 5,000 तक की कृषि-आय |
धारा 112A के अंतर्गत ₹ 1,25,000 तक का पूंजीगत लाभ |
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नोट: आई.टी.आर.-1 का उपयोग निम्नलिखित व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकता है: (a) किसी कंपनी में निदेशक है (b) अल्पकालिक पूँजी अभिलाभ है (c) धारा 112A (आयकर अधिनियम, 1961) के अंतर्गत दीर्घकालिक पूँजी अभिलाभ है जो ₹ 1.25 लाख से अधिक है (d) पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय उसके पास कोई असूचीबद्ध इक्विटी शेयर रहा हो (e) जिसके पास भारत के बाहर स्थित कोई भी संपत्ति (किसी भी इकाई में वित्तीय हित सहित) है (f) भारत के बाहर स्थित किसी भी खाते पर हस्ताक्षर करने का अधिकार (साइनिंग अथॉरिटी) उसके पास है (g) भारत के बाहर किसी भी स्रोत से उसकी आय है (h) वह व्यक्ति है जिसके मामले में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194N के अंतर्गत कर काटा गया है (i) वह व्यक्ति है जिसके मामले में ईएसओपी (ESOP) पर कर का भुगतान या कटौती स्थगित (deferred) की गई है (j) उसकी कुल आय ₹ 50 लाख से अधिक है |
यह विवरणी व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए लागू है।
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जिसके पास व्यवसाय या पेशे से लाभ या लाभांश शीर्षक के अंतर्गत आय नहीं है |
वह व्यक्ति जो आईटीआर-1 दाखिल करने के लिए पात्र नहीं है |
यह विवरणी व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए लागू है।
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जिसके पास व्यवसाय या पेशे से लाभ या लाभांश शीर्षक के अंतर्गत आय हो |
जो आई.टी.आर.-1, आई.टी.आर.-2 या आई.टी.आर.-4 दाखिल करने के लिए पात्र नहीं है |
यह विवरणी एक व्यक्ति या हिन्दु अविभाजित परिवार (एच.यू.एफ.) के लिए लागू होता है, जो साधारणतया निवासी के अलावा अन्य निवासी नहीं है या एक फर्म (एल.एल.पी. के अलावा) जो एक निवासी है जो ₹ 50 लाख तक की कुल आय वाला है और जिसकी आय कारोबार और व्यवसाय से है जो की निम्नलिखित स्रोतों से किसी भी प्रकल्पित आधार और आय पर संगणित की जाती है:
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वेतन/ पेंशन |
एक गृह संपत्ति |
अन्य स्रोत (ब्याज, परिवार की पेंशन, लाभांश आदि) |
₹ 5,000 तक की कृषि-आय |
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AD / 44ADA / 44AE के तहत अनुमानित आधार पर गणना की गई व्यवसाय / पेशे से आय |
धारा 112A (आयकर अधिनियम, 1961) के अंतर्गत ₹ 125000 तक का पूंजीगत लाभ |
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नोट:1 आई.टी.आर.-4 का उपयोग ऐसे व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकता है जो: (a) किसी कंपनी में निदेशक है (b) जिसे अल्पकालिक पूंजी लाभ है (c) जिसे धारा 112A (आयकर अधिनियम, 1961) के अंतर्गत ₹ 1.25 लाख से अधिक दीर्घकालिक पूँजी अभिलाभ है (d) जिसके पास पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय कोई गैर-सूचीबद्ध इक्विटी शेयर रहा हो (e) जिसके पास भारत के बाहर स्थित कोई भी संपत्ति (किसी भी इकाई में वित्तीय हित सहित) है (f) जिसके पास भारत के बाहर स्थित किसी भी खाते पर हस्ताक्षर करने का अधिकार है (g) जिसकी भारत के बाहर किसी भी स्रोत से आय है (h) जिसके प्रकरण में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194N के अंतर्गत कर काटा गया है (i) जिसके प्रकरण में ईएसओपी (ESOP) पर कर का भुगतान या कटौती स्थगित (deferred) की गई है (j) जिसकी कुल आय ₹ 50 लाख से अधिक है
नोट: 2 आई.टी.आर. -4 (सुगम) अनिवार्य नहीं है। यह एक सरल विवरणी है जिसे एक करदाता अपनी इच्छा अनुसार उपयोग कर सकता है, यदि वह कर अधिनियम, 1961 की धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत अनुमानीय आधार पर व्यवसाय और पेशे से लाभ और कमाई घोषित करने के योग्य है। |
नोट:
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194P, 75 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयकर विवरणी दाखिल करने से छूट देने के लिए शर्तें प्रदान करती है।
छूट की शर्तें हैं:
- वरिष्ठ नागरिक की आयु 75 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए
- वरिष्ठ नागरिक पिछले वर्ष में 'निवासी' होना चाहिए
- वरिष्ठ नागरिक के पास केवल पेंशन आय और ब्याज आय है और वह ब्याज आय उसी निर्दिष्ट बैंक से अर्जित/उपार्जित होती है जिसमें वह अपनी पेंशन प्राप्त कर रहे हैं
- वरिष्ठ नागरिक निर्दिष्ट बैंक को एक घोषणा प्रस्तुत करेगा।
- बैंक एक 'निर्दिष्ट बैंक' है जैसा कि केंद्रीय सरकार द्वारा घोषित किया गया है। ऐसे बैंक वरिष्ठ नागरिकों के टीडीएस कटौती के लिए जिम्मेदार होंगे, जो कि आयकर अधिनियम, 1961 के अध्याय VI-A के तहत कटौतियों और धारा 87A के तहत रियायत को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।
- चूँकि ऊपर उल्लिखित बैंक 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर की कटौती करता है, इसलिए वरिष्ठ नागरिकों को आयकर रिटर्न जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
1. फ़ॉर्म 15H - एक व्यक्ति (जिसकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है) द्वारा कर कटौती के बिना कुछ प्राप्तियों का दावा करने के लिए की जाने वाली घोषणा
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निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए कर स्लैब***
- नई कर व्यवस्था बनाम पुरानी कर व्यवस्था:
- वित्त अधिनियम, 2023 ने निर्धारण वर्ष 2024-25 से प्रभावी धारा 115BAC के प्रावधानों में संशोधन किया है, ताकि व्यक्ति, HUF, AOP (सहकारी समितियों को छोड़कर), BOI या कृत्रिम विधिक व्यक्ति के रूप में निर्धारिती के लिए नई कर व्यवस्था को डिफ़ॉल्ट कर व्यवस्था बनाया जा सके। हालांकि, पात्र करदाता नई कर व्यवस्था से बाहर निकलने और पुरानी कर व्यवस्था के तहत कराधान का विकल्प चुन सकते हैं। पुरानी कर व्यवस्था उस आयकर गणना प्रणाली और स्लैब को संदर्भित करती है जो नई कर व्यवस्था लागू होने से पहले मौजूद थी। पुरानी कर व्यवस्था में, करदाताओं के पास विभिन्न कर कटौतियों और छूटों का दावा करने का विकल्प होता है। हालांकि, डिफ़ॉल्ट कर व्यवस्था में, कर दरें पुरानी कर व्यवस्था की तुलना में होती हैं।
गैर-व्यावसायिक मामले:
"गैर-व्यवसाय मामलों" में, कर व्यवस्था का चयन करने का विकल्प प्रत्येक वर्ष सीधे आई.टी.आर. में लगाया जा सकता है, और ऐसा आई.टी.आर. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(1) के अंतर्गत निर्दिष्ट नियत तिथि या उससे पूर्व दाखिल किया जाना आवश्यक है।
व्यवसाय के मामलों:
व्यवसाय और पेशे से आय वाले पात्र करदाताओं के मामले में, यदि करदाता डिफ़ॉल्ट कर प्रणाली से बाहर निकलना चाहता है, तो वे आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि से पहले धारा 139(1) के तहत फ़ॉर्म-10-IEA प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके साथ ही, इस विकल्प को वापस लेने के उद्देश्य के लिए यानी नई कर व्यवस्था में पुनः प्रवेश करने के लिए भी फ़ॉर्म नं.10-IEA प्रस्तुत करना होगा। हालांकि, पुरानी कर व्यवस्था को वापस लेने और डिफ़ॉल्ट कर व्यवस्था में पुनः प्रवेश करने का विकल्प केवल आगामी कर वर्ष के लिए उपलब्ध है और यह विकल्प व्यवसाय और पेशे से आय रखने वाले पात्र करदाताओं के लिए जीवन में केवल एक बार ही उपलब्ध है।
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पुरानी कर व्यवस्था |
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115BAC के तहत नई कर व्यवस्था |
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आयकर स्लैब |
आयकर दर |
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आयकर स्लैब |
आयकर दर |
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₹ 3,00,000 तक |
शून्य |
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₹ 4,00,000 तक |
शून्य |
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₹ 3,00,001 - ₹ 5,00,000** |
₹ 3,00,000 से अधिक 5% |
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₹ 4,00,001 - ₹ 8,00,000** |
₹ 4,00,000 से अधिक 5% |
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₹ 5,00,001 - ₹ 10,00,000 |
₹ 10,000 + ₹ 5,00,000 से ऊपर 20% |
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₹ 8,00,001 - ₹ 12,00,000 |
₹20,000 + ₹ 8,00,000 से अधिक 10% |
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₹ 10,00,000 |
₹ 1,10,000 + ₹ 10,00,000 से अधिक 30% |
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₹ 12,00,001 - ₹ 16,00,000 |
₹ 60,000 + ₹ 12,00,000 से अधिक 15% |
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₹ 16,00,001 - ₹ 20,00,000 |
₹ 1,20,000 + ₹ 16,00,000 से अधिक 20% |
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₹ 20,00,001 - ₹ 24,00,000 |
₹ 2,00,000 + ₹ 20,00,000 से अधिक 25% |
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24,00,000 से ऊपर |
₹ 3,00,000 + ₹ 24,00,000 से अधिक 30% |
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पुरानी कर व्यवस्था |
धारा 115BAC के अंतर्गत नई कर व्यवस्था |
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आयकर स्लैब |
आयकर दर |
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आयकर स्लैब |
आयकर दर |
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₹ 5,00,000 तक |
शून्य |
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₹ 3,00,000 तक |
शून्य |
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₹ 5,00,001 - ₹ 10,00,000 |
₹5,00,000 से अधिक 20% |
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₹ 3,00,001 - ₹ 7,00,000** |
₹3,00,000 से अधिक पर 5% |
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₹ 10,00,001- ₹ 50,00,000 |
₹1,00,000 + ₹10,00,000 से ऊपर 30% |
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₹ 7,00,001 - ₹ 10,00,000 |
₹ 20,000 + ₹ 7,00,000 से अधिक 10% |
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₹ 10,00,001 - ₹ 12,00,000 |
₹ 50,000 + ₹ 10,00,000 से अधिक 15% |
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₹ 12,00,001 - ₹ 15,00,000 |
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₹ 15,00,001- ₹ 50,00,000 |
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₹ 50,00,001- ₹ 100,00,000 |
₹ 1,40,000 + ₹15,00,000 से अधिक 30% |
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₹ 100,00,001- ₹ 200,00,000 |
1,40,000 + ₹15,00,000 से अधिक 30% |
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₹ 200,00,001 से अधिक |
₹ 1,40,000 + ₹15,00,000 से अधिक 30% |
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*नोट: बढ़ी हुई अधिभार दर 25% और 37%, जैसा कि मामला हो, उन आयों पर नहीं लगाई जाती जो धारा 111A, 112, 112A और लाभांश आय के तहत कर योग्य हैं। इसलिए, ऐसी आयों पर देय कर पर अधिभार की अधिकतम दर 15% होगी, सिवाय जब आय धारा 115A, 115AB, 115AC, 115ACA और 115E के तहत कर योग्य हो।
लागू अधिभार दरें:
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आय सीमा |
आयकर की राशि पर अधिभार दर
(नई कर व्यवस्था) |
आयकर की राशि पर अधिभार दर
(पुरानी कर व्यवस्था)
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₹50 लाख तक |
शून्य |
शून्य |
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रु. 50 लाख से रु. 1 करोड़ |
10% |
10% |
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रु. 1 करोड़ से रु. 2 करोड़ |
15% |
15% |
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रु. 2 करोड़ से रु. 5 करोड़ |
25% |
25% |
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रु. 5 करोड़ से अधिक |
25% |
37% |
ध्यान दें: जिन मामलों में लागू हो, बढ़ी हुई अधिभार राशि 25% और 37% उस आय पर नहीं लगाई जाती जो धारा 111A, 112, 112A (आयकर अधिनियम, 1961) और लाभांश आय के तहत कर योग्य है। इसलिए, ऐसी आय पर देय कर पर अधिकतम अधिभार दर 15% होगी, सिवाय इसके कि आय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115A, 115AB, 115AC, 115ACA और 115E के तहत कर योग्य हो।
***ध्यान दें : स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर @ 4% आयकर की राशि पर और अधिभार (यदि कोई हो) पर दोनों व्यवस्थाओं में देय होगा। |
पुरानी कर व्यवस्था के अंतर्गत, यदि अर्जित आय की राशि क्रमशः ₹ 50 लाख, ₹ 1 करोड़, ₹ 2 करोड़ या ₹ 5 करोड़ से अधिक हो, तो अधिभार (सरचार्ज) पर सीमांत राहत (मार्जिनल रिलीफ) का भी दावा किया जा सकता है; तथा यदि अर्जित आय की राशि क्रमशः ₹ 50 लाख, ₹ 1 करोड़, ₹ 2 करोड़ से अधिक हो
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A. धारा 115BAC (1A) के अंतर्गत नई कर व्यवस्था का चयन करने वाले करदाता के लिए निम्नलिखित कटौतियाँ उपलब्ध होंगी:
1. धारा 24(b) – गृह ऋण पर भुगतान किए गए ब्याज पर गृह संपत्ति से आय से कटौती:
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धारा 80CCD(2) |
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केंद्र सरकार की पेंशन योजना में नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान की कटौती
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B. पुरानी कर व्यवस्था का चयन करने वाले करदाता के लिए निम्नलिखित कटौतियाँ उपलब्ध होंगी:
- **धारा 24(b) – गृह ऋण एवं गृह सुधार ऋण पर भुगतान किए गए ब्याज पर गृह संपत्ति से आय से कटौती। स्व-अधिकृत संपत्ति के मामले में, गृह ऋण पर भुगतान किए गए ब्याज की कटौती की ऊपरी सीमा ₹ 2 लाख है। धारा 24(b) के अंतर्गत स्वीकार्य ऋण पर ब्याज नीचे सारणीबद्ध किया गया है:
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धारा 80C, 80CCC, 80CCD (1) |
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किए गए भुगतान के लिए कटौती
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धारा 80CCD(1B)
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नोट: धारा 80CCD(1) एवं 80CCD(1B) के अंतर्गत कटौती का दावा करने वाले करदाताओं को नीचे दिए अनुसार विवरण प्रदान करना आवश्यक है
• योगदान की राशि
• करदाता का पीआरएएन (PRAN)
धारा 80CCD(2)
केंद्रीय सरकार की पेंशन योजना में नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान की कटौती
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यदि नियोक्ता एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या अन्य है |
वेतन के 10% की कटौती सीमा |
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यदि नियोक्ता केंद्र या राज्य सरकार है |
वेतन के 14% की कटौती सीमा |
धारा 80D
वरिष्ठ नागरिक पर उपगत चिकित्सा सम्बन्धी व्यय के लिए कटौती, यदि स्वास्थ्य बीमा कवरेज पर किसी प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया है
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कृपया ध्यान दें:
यदि आप धारा 80D के अंतर्गत कटौती का दावा करना चाहते हैं, तो आपको नीचे दिए गए विवरण दर्ज करने होंगे:
• बीमाकर्ता (बीमा कंपनी) का नाम
• पॉलिसी संख्या
• स्वास्थ्य बीमा राशि
धारा 80DD
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ध्यान दें:
धारा 80DD के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए आई.टी.आर. में नीचे दिए गए विवरण प्रदान करने होंगे
• दिव्यांगता की प्रकृति
• दिव्यांगता का प्रकार
• कटौती की राशि
• आश्रित का प्रकार
• आश्रित का पैन (PAN)
• आश्रित का आधार (Aadhaar)
• ऑटिज़्म, सेरेब्रल पाल्सी, या एकाधिक दिव्यांगताओं के मामले में दाखिल फॉर्म 10 IA की स्वीकृति संख्या (Acknowledgement number)
• यूडीआईडी (UDID) संख्या (यदि उपलब्ध हो)
धारा 80DDB
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धारा 80E
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ध्यान दें:
धारा 80E के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए, आई.टी.आर. में नीचे दिए गए विवरण प्रदान करने होंगे :
• बैंक / संस्थान से लिया गया ऋण
• जिस संस्थान / बैंक से ऋण लिया गया है, उसका नाम
• बैंक / संस्थान का ऋण खाता संख्या
• ऋण स्वीकृति की तिथि
• ऋण की कुल राशि
• वित्तीय वर्ष की अंतिम तिथि पर बकाया ऋण
• धारा 80E के अंतर्गत ब्याज
धारा 80EE
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ध्यान दें:
धारा 80EE के अंतर्गत दावा करने के लिए, आई.टी.आर. में नीचे दिए गए विवरण प्रदान करने होंगे:
• जिस बैंक / संस्थान से ऋण लिया गया है, उसका नाम
• बैंक / संस्थान का ऋण खाता संख्या
• ऋण स्वीकृति की तिथि
• ऋण की कुल राशि
• वित्तीय वर्ष की अंतिम तिथि पर बकाया ऋण
• धारा 80EE के अंतर्गत ब्याज
धारा 80EEA
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₹ 1,50,000 की कटौती सीमा लिए गए ऋण पर ब्याज के लिए भुगतान की गई कुल राशि |
ध्यान दें:
धारा 80EEA के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए, आई.टी.आर. में नीचे दिए गए विवरण प्रदान करने होंगे:
• आवासीय गृह संपत्ति का स्टांप मूल्य (Stamp value)
• बैंक / संस्थान से लिया गया ऋण
• जिस बैंक / संस्थान से ऋण लिया गया है, उसका नाम
• बैंक / संस्थान का ऋण खाता संख्या
• ऋण स्वीकृति की तिथि
• ऋण की कुल राशि
• वित्तीय वर्ष की अंतिम तिथि पर बकाया ऋण
• धारा 80EEA के अंतर्गत ब्याज
कृपया ध्यान दें कि धारा 80EEA के अंतर्गत कटौती का दावा केवल तभी किया जा सकता है, जब धारा 24(b) की सीमा समाप्त हो चुकी हो। साथ ही, करदाता द्वारा ऋण स्वीकृति तिथि एवं अन्य पात्र शर्तों के आधार पर या तो धारा 80EE या धारा 80EEA का दावा किया जा सकता है।
धारा 80EEB
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ध्यान दें:
धारा 80EEA के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए, आई.टी.आर. में नीचे दिए गए विवरण प्रदान करने होंगे:
• बैंक / संस्थान से लिया गया ऋण
• जिस बैंक / संस्थान से ऋण लिया गया है, उसका नाम
• बैंक / संस्थान का ऋण खाता संख्या
• ऋण की कुल राशि
• वित्तीय वर्ष की अंतिम तिथि पर बकाया ऋण
• धारा 80EEB के अंतर्गत ब्याज राशि
• वाहन पंजीकरण संख्या
धारा 80G
निर्धारित निधियों, धर्मार्थ संस्थानों आदि को किए गए दान हेतु कटौती
दान नीचे दी गई श्रेणियों के अंतर्गत कटौती के पात्र है
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नोट: इस धारा के अंतर्गत ₹ 2000/- से अधिक के नकद दान के संबंध में कोई कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी।
धारा 80GG
मकान के लिए भुगतान किए गए किराए हेतु कटौती तथा यह केवल उन व्यक्तियों पर लागू होती है जो स्व-नियोजित हैं या जिनके लिए एचआरए (HRA) वेतन का भाग नहीं है
निम्नलिखित में से सबसे कम को कटौती के रूप में अनुमति
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इस कटौती से पहले कुल आय का 10% घटाने के बाद भुगतान किया गया किराया |
₹ 5,000 प्रति माह |
कुल आय का 25% (धारा 111A के तहत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ या धारा 115A या 115D के तहत आय को छोड़कर) |
नोट: धारा 80GG के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए, फॉर्म 10 BA दाखिल करना अनिवार्य है तथा आय विवरणी दाखिल करते समय अनुसूची 80 GG में फॉर्म 10 BA की (पावती संख्या) दर्ज करना आवश्यक है।
धारा 80GGA
वैज्ञानिक अनुसंधान या ग्रामीण विकास के लिए किए गए दान के लिए कटौती
दान निम्न श्रेणियों के अंतर्गत कटौती के लिए पात्र हैं:
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अनुसंधान संघ या विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था के लिए
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संघ या संस्था के लिए
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किसी पात्र परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए राष्ट्रीय समिति द्वारा अनुमोदित पी.एस.यू. या स्थानीय प्राधिकरण या संस्था को भुगतान की जाने वाली राशि |
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केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित निधि
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केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित और अधिसूचित की गई राष्ट्रीय शहरी गरीबी उन्मूलन निधि |
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धारा 80GGC
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धारा 80TTB
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धारा 80U
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कृपया ध्यान दें
धारा 80U के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए, नीचे दिए गए विवरण प्रदान करने होंगे।
• दिव्यांगता की प्रकृति
• दिव्यांगता का प्रकार
• कटौती की राशि
• ऑटिज़्म, सेरेब्रल पाल्सी, या एकाधिक दिव्यांगताओं के मामले में दाखिल फॉर्म 10 IA की पावती संख्या
• यूडीआईडी (UDID) संख्या (यदि उपलब्ध हो)
करदाता की आयु की परवाह किए बिना लागू कर लाभों के साथ साथ, वरिष्ठ/अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुछ अन्य बढ़े हुए / अतिरिक्त लाभ हैं।
आयकर विवरणी का कागजी दाखिला
अति वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष या उससे अधिक आयु) के पास फॉर्म 1 या 4 का उपयोग करके ऑफ़लाइन / पेपर ढंग में अपना आई.टी.आर. जमा करने का विकल्प है। ई-फाइलिंग विकल्प भी उनके लिए उपलब्ध रहता है।
अग्रिम कर भुगतान से राहत
धारा 208, आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार, हर व्यक्ति जिसका वार्षिक अनुमानित कर देयता ₹ 10,000 या उससे अधिक है, उसे अग्रिम कर के रूप में अपना कर अग्रिम रूप से जमा करना होगा। लेकिन, धारा 207, आयकर अधिनियम, 1961 निवासी वरिष्ठ नागरिक को अग्रिम कर भुगतान से राहत देती है। इस प्रकार, कोई ऐसा निवासी वरिष्ठ नागरिक जिसकी आय व्यवसाय या पेशे से नहीं है, उसे अग्रिम कर का भुगतान करने की जिम्मेदारी नहीं है। इसलिए, 234B और 234C वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए, जो ITR 1 और ITR 2 दाखिल कर रहे हैं, लागू नहीं होते।
बैंक जमा के ब्याज पर आयकर कटौती
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80TTB बैंकों, डाकघरों या सहकारी बैंकों में जमा पर अर्जित ब्याज पर कर लाभ की अनुमति देती है। यह कटौती वरिष्ठ नागरिक द्वारा अर्जित अधिकतम ₹ 50,000 तक के ब्याज आय के लिए अनुमति है। बचत जमा और निश्चित जमा पर अर्जित दोनों प्रकार के ब्याज इस प्रावधान के तहत कटौती के लिए पात्र हैं।
इसके अलावा, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194A के अंतर्गत, बैंक, डाक घर या सहकारी बैंक द्वारा किसी वरिष्ठ नागरिक को ₹ 50,000 तक के ब्याज भुगतान पर स्रोत पर कर (TDS) नहीं कटता है। यह सीमा प्रत्येक बैंक के लिए अलग-अलग गणना की जानी चाहिए।
चिकित्सा सम्बन्धी बीमा और व्यय के संबंध में कर लाभ
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80D के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम के भुगतान के लिए ₹50,000 तक की उच्च छूट का लाभ उठा सकते हैं। गैर-वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह सीमा ₹25,000 है।
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80DDB के अंतर्गत किसी व्यक्ति द्वारा अपने ऊपर या किसी आश्रित पर विशेष रोगों के उपचार के लिए किए गए खर्चों पर कर छूट की अनुमति देता है जैसा कि अधिनियम में उल्लेख किया गया है। वरिष्ठ नागरिक के मामले में अधिकतम कटौती राशि ₹ 1 लाख है (गैर-वरिष्ठ नागरिक करदाताओं के लिए ₹ 40,000)।