Do not have an account?
Already have an account?

 

निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए साझेदारी फर्म / एल.एल.पी. हेतु लागू विवरणियाँ और प्रपत्र

 

अस्वीकरण: इस पृष्ठ पर दी गई सामग्री केवल अवलोकन / सामान्य मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु है और यह संपूर्ण नहीं है। पूर्ण विवरण और दिशानिर्देशों के लिए कृपया आयकर अधिनियम, 1961, नियमों और अधिसूचनाओं का संदर्भ लें।

 

 

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(23)(i) में यह कहा गया है कि फर्म का अर्थ वही होगा जो भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 में दिया गया है। भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 4 में फर्म को निम्नानुसार परिभाषित किया गया है:

 

“वे व्यक्ति जिन्होंने एक-दूसरे के साथ साझेदारी की है, व्यक्तिगत रूप से "भागीदार" कहलाते हैं और सामूहिक रूप से "फर्म" कहलाते हैं, तथा जिस नाम से उनका व्यवसाय संचालित किया जाता है उसे "फर्म का नाम" कहा जाता है।”

 

आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार, फर्म में सीमित दायित्व भागीदारी (एल.एल.पी.) भी शामिल होगी, जैसा कि सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 में परिभाषित किया गया है। सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 की धारा 2(1)(n) में “सीमित दायित्व भागीदारी” को इस अधिनियम के अंतर्गत गठित और पंजीकृत भागीदारी के रूप में परिभाषित किया गया है। यह अपने भागीदार से पृथक एक विशिष्ट विधिक इकाई है।

1. आई.टी.आर.-4 (सुगम) – व्यक्ति, एच.यू.एफ. एवं फर्म (एल. एल.पी. के अतिरिक्त) पर लागू

 

यह विवरणी ऐसे व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार (एच.यू.एफ.) के लिए लागू है, जो निवासी है, किन्तु सामान्यतः निवासी नहीं है, अथवा ऐसी फर्म (एल.एल.पी. के अतिरिक्त) के लिए लागू है, जो निवासी है तथा जिसकी कुल आय ₹ 50 लाख तक है और जिसकी व्यवसाय या पेशे से आय अनुमानित आधार पर (आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AD / 44ADA / 44AE के अंतर्गत) संगणित की जाती है तथा निम्नलिखित में से किसी स्रोत से आय प्राप्त होती है:

दो गृह संपत्तियाँ

अन्य स्रोत (ब्याज, परिवार की पेंशन, लाभांश आदि),

₹ 5,000 तक की कृषि-आय

 

 

टिप्पणी: इस आई.टी.आर.-4 का उपयोग वह व्यक्ति नहीं कर सकता जिस के पास : (a) किसी कंपनी में निदेशक है (b) ने पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय कोई गैर-सूचीबद्ध इक्विटी शेयर धारण किए हों (c) जिसकी कोई परिसंपत्ति (किसी भी इकाई में वित्तीय हित सहित) भारत के बाहर स्थित हो (d) जिसे भारत के बाहर स्थित किसी खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार प्राप्त हो (e) जिसकी भारत के बाहर किसी स्रोत से आय हो (f) ऐसा व्यक्ति जिसके मामले में ESOP पर कर के भुगतान या कटौती को स्थगित किया गया हो (g) जिसके पास किसी भी आय शीर्ष के अंतर्गत अग्रेषित हानि या आगे ले जाई जाने वाली हानि हो

(h) जिसकी कुल आय ₹ 50 लाख से अधिक हो।

(i) जिसे धारा 89A के अंतर्गत अधिसूचित देश में अनुरक्षित सेवानिवृत्ति लाभ खाते से आय प्राप्त होती हो।

(j) जिसे धारा 89A के अंतर्गत अधिसूचित देश के अतिरिक्त किसी अन्य देश में अनुरक्षित सेवानिवृत्ति लाभ खाते से आय प्राप्त होती हो।

(k) जिसकी कोई आय विशिष्ट दर पर प्रभार्य हो।

 

 

कृपया ध्यान दें कि आई.टी.आर. -4 (सुगम) अनिवार्य नहीं है। यह एक सरलीकृत विवरणी प्रपत्र है, जिसका उपयोग कोई निर्धारणी अपनी इच्छा से कर सकता है, यदि वह आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AD, 44ADA या 44AE के अंतर्गत व्यवसाय या पेशे से लाभ एवं प्राप्तियों को अनुमानित आधार पर घोषित करने के लिए पात्र है।

 

 

 

 

2. आई.टी.आर. -5

 

 

यह विवरणी निम्नलिखित व्यक्ति के लिए लागू है:

  1. फर्म
  2. सीमित दायित्व भागीदारी (एल.एल.पी.)
  3. व्यक्तियों का संघ (ए.ओ.पी.)
  4. व्यक्तियों का निकाय (बी.ओ.आई.)
  5. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(31) के खंड (vii) में उल्लिखित कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (ए.जे.पी.)।
  6. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(31) के खंड (vi) में उल्लिखित स्थानीय प्राधिकरण।
  7. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 160(1)(iii) अथवा (iv) में उल्लिखित प्रतिनिधि निर्धारणी।
  8. सहकारी समिति
  9. सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 अथवा किसी राज्य के अन्य किसी विधि के अंतर्गत पंजीकृत सोसाइटी
  10. ऐसे न्यास, जो फॉर्म ITR-7 दाखिल करने के लिए पात्र न्यासों के अतिरिक्त हों।
  11. मृत व्यक्ति की संपदा
  12. दिवालिया व्यक्ति की संपदा
  13. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(4E) में उल्लिखित व्यवसाय न्यास तथा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(4F) में उल्लिखित निवेश निधि।

  टिप्पणी: तथापि, ऐसा व्यक्ति जिसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(4A) अथवा 139(4B) अथवा 139(4D) के अंतर्गत आय की विवरणी दाखिल करना आवश्यक है, वह इस प्रपत्र का उपयोग नहीं करेगा।

 

आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार लागू प्रपत्र

1. प्रपत्र 26AS

 

फ़ॉर्म 26AS

AIS (वार्षिक सूचना विवरण)

द्वारा प्रदान किया गया:

आयकर विभाग (यह ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध है:

लॉगिन > ई-फ़ाइल > आयकर विवरणी > फॉर्म 26AS देखें)

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण:

स्रोत पर कटौती / संग्रहित कर।

द्वारा प्रदान किया गया:

आयकर विभाग (इसे आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद अभिगमित किया जा सकता है)

ई-फाइलिंग पोर्टल > लॉगिन > AIS पर जाएँ

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण:

  • स्रोत पर कटौती / संग्रहित कर
  • SFT सूचना
  • करों का भुगतान
  • माँग / प्रतिदाय

अन्य जानकारी (जैसे लंबित/पूर्ण कार्यवाहियाँ, जी.एस.टी. सूचना, विदेशी सरकार से प्राप्त जानकारी आदि)

 

 

टिप्पणी: (अग्रिम कर/SAT, प्रतिदाय का विवरण, SFT लेनदेन, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194 IA, 194 IB, 194M के अंतर्गत TDS, TDS चूक) से संबंधित जानकारी, जो 26AS में उपलब्ध थी, अब AIS में उपलब्ध है

 

2. प्रपत्र 16A – वेतन के अतिरिक्त आय पर TDS हेतु आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 203 के अंतर्गत प्रमाणपत्र

 

द्वारा प्रदान किया गया

फ़ॉर्म में प्रदान किए गए ब्यौरे:

कटौतीकर्ता से डिडक्टी (कटौती-प्राप्तकर्ता) तक

आयकर विभाग (आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद इसे एक्सेस किया जा सकता है)

ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएँ > लॉगिन करें > एआईएस (AIS)

 

 

 

3. फ़ॉर्म 3CA-3CD

 

द्वारा प्रस्तुत

फ़ॉर्म में प्रदान किए गए ब्यौरे:

किसी अन्य विधि के अंतर्गत अनिवार्य लेखा-परीक्षा की आवश्यकता वाले करदाता तथा जिन्हें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 44AB के अंतर्गत अपने खातों का लेखा-परीक्षण किसी लेखापाल से कराना आवश्यक है। इसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तिथि से एक महीना पूर्व प्रस्तुत किया जाना है।

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 44AB के अंतर्गत प्रस्तुत किए जाने हेतु खातों की लेखा-परीक्षा की रिपोर्ट तथा विवरणों का विवरण।

 

 

4. फ़ॉर्म 3CB-3CD

 

 

द्वारा प्रस्तुत

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण

ऐसा करदाता जिसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 44AB के अंतर्गत अपने खातों का लेखा-परीक्षण किसी लेखापाल से कराना आवश्यक है। इसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तिथि से एक महीना पूर्व प्रस्तुत किया जाना है।

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 44AB के अंतर्गत प्रस्तुत किए जाने हेतु खातों की लेखा-परीक्षा की रिपोर्ट (फ़ॉर्म 3CB) तथा विवरणों का विवरण (फ़ॉर्म 3CD)।

 

 

 

5. फ़ॉर्म 3CEB

 

द्वारा प्रस्तुत

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण

ऐसा करदाता जो किसी अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन अथवा विनिर्दिष्ट घरेलू लेनदेन में प्रवेश करता है, उसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 92E के अंतर्गत एक चार्टर्ड लेखापाल से रिपोर्ट प्राप्त करना आवश्यक है। इसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तिथि से एक महीना पूर्व प्रस्तुत किया जाना है।

सभी अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन(नों) तथा विनिर्दिष्ट घरेलू लेनदेन(नों) का विवरण समाहित करने वाली चार्टर्ड लेखापाल की रिपोर्ट।

 

 

6. फ़ॉर्म 3CE

 

द्वारा प्रस्तुत

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण

भारत में व्यवसाय करने वाला अनिवासी करदाता अथवा विदेशी कंपनी, जिसे विनिर्दिष्ट व्यक्तियों से विनिर्दिष्ट आय प्राप्त होने पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 44DA के अंतर्गत एक लेखापाल से रिपोर्ट प्राप्त करना आवश्यक है। इसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तिथि से एक महीना पूर्व प्रस्तुत किया जाना है।

सरकार अथवा किसी भारतीय संस्थान से स्वत्त्व शुल्क या तकनीकी सेवाओं के शुल्क के रूप में आय प्राप्ति से संबंधित लेखापाल की रिपोर्ट।

 

 

7. फ़ॉर्म 29C

 

द्वारा प्रस्तुत

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण

ऐसा करदाता जिसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 115JC के अंतर्गत एक लेखापाल से रिपोर्ट प्राप्त करना आवश्यक है।

कंपनी के अतिरिक्त अन्य व्यक्ति की समायोजित कुल आय तथा वैकल्पिक न्यूनतम कर की गणना हेतु आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 115JC के अंतर्गत रिपोर्ट।

 

 

8. प्रपत्र 67 - भारत के बाहर किसी देश अथवा विनिर्दिष्ट क्षेत्र से आय तथा विदेशी कर क्रेडिट का विवरण

 

 

द्वारा प्रस्तुत

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण

करदाता द्वारा, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 139(1) के अंतर्गत ITR प्रस्तुत करने के लिए विनिर्दिष्ट नियत तिथि को अथवा उससे पूर्व प्रस्तुत किया जाना है।

भारत के बाहर किसी देश अथवा विनिर्दिष्ट क्षेत्र से आय तथा दावा किया गया विदेशी कर क्रेडिट

 

 

9.फ़ॉर्म 10CCB

 

द्वारा प्रस्तुत

फ़ॉर्म में उपबंध किए गए विवरण

ऐसा करदाता जिसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 80(7) / 80-IA / 80-IB / 80-IC / 80-IE के अंतर्गत कटौतियों का दावा करने हेतु एक लेखापाल से रिपोर्ट प्राप्त करना आवश्यक है।

1. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 80-I(7) / 80-IA / 80-IB / 80-IC / 80-IE के अंतर्गत कटौती का दावा करने हेतु प्रपत्र 10CCB में लेखा-परीक्षा रिपोर्ट एक अनिवार्य आवश्यकता है।

2. इसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा के तहत 139(1) के अंतर्गत ITR दाखिल करने की नियत तिथि से 1 महीना पूर्व दाखिल किया जाना है।

 

 

निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए साझेदारी फर्म / एल.एल.पी. हेतु कर स्लैब

निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए, साझेदारी फर्म (एल.एल.पी. सहित) पर 30% की दर से कर लगाया जाता है।

अधिभार, सीमांत राहत तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर

 

अधिभार क्या है?

यदि कुल आय विनिर्दिष्ट सीमाओं से अधिक हो जाती है, तो आयकर की राशि पर निम्नलिखित दरों से अधिभार लगाया जाता है:

  • करयोग्य आय ₹ 1 करोड़ से अधिक होने पर 12%

 

अधिभार क्या है?

यदि कुल आय विनिर्दिष्ट सीमाओं से अधिक हो जाती है, तो आयकर की राशि पर निम्नलिखित दरों से अधिभार लगाया जाता है:

  • करयोग्य आय ₹ 1 करोड़ से अधिक होने पर 12%

सीमांत राहत क्या है?

अधिभार से सीमांत राहत निम्नलिखित प्रकार से उपलब्ध है:

  • यदि शुद्ध आय ₹ 1 करोड़ से अधिक हो जाती है, तो आयकर तथा अधिभार के रूप में देय राशि, ₹ 1 करोड़ की कुल आय पर देय कुल आयकर की राशि से उस आय की राशि से अधिक नहीं होगी जो ₹ 1 करोड़ से अधिक है।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर क्या है?

आयकर तथा अधिभार (यदि कोई हो) की राशि पर 4% की दर से स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर भी देय होगा।

 

टिप्पणी: ऐसी फर्म / एलएलपी, जिसकी सामान्य कर देयता बही लाभ के 18.5% से कम है, उसे बही लाभ के 18.5% (साथ में लागू अधिभार तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर) की दर से AMT (वैकल्पिक न्यूनतम कर) का भुगतान करना होगा।

निवेश / भुगतान / आय जिन पर कर लाभ उपलब्ध है 

आयकर अधिनियम, 1961 के अध्याय VIA के अंतर्गत विनिर्दिष्ट कर कटौतियाँ

धारा 80G

 

विनिर्दिष्ट निधियों, धर्मार्थ संस्थानों आदि को किए गए दानों पर कटौती

दान निम्नलिखित श्रेणियों के अंतर्गत कटौती हेतु पात्र हैं

योग्यता सीमा के अधीन रहते हुए

 

किए गए दान का100%

किए गए दान का50%

बिना किसी सीमा के

 

किए गए दान का100%

किए गए दान का 50%

टिप्पणी: इस धारा के अंतर्गत ₹ 2000/- से अधिक नकद में किए गए दान के संबंध में कोई कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी।

 

 

धारा 80GGA

 

वैज्ञानिक अनुसंधान अथवा ग्रामीण विकास हेतु किए गए दानों पर कटौती

दान निम्नलिखित श्रेणियों के अंतर्गत कटौती हेतु पात्र हैं

निम्नलिखित हेतु अनुसंधान संघ अथवा विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्थान:

  • वैज्ञानिक अनुसंधान
  • सामाजिक विज्ञान अथवा सांख्यिकीय अनुसंधान

निम्नलिखित हेतु संघ अथवा संस्थान:

  • ग्रामीण विकास
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अथवा वनीकरण हेतु

किसी पात्र परियोजना के क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रीय समिति द्वारा अनुमोदित PSU अथवा स्थानीय प्राधिकरण अथवा संघ अथवा संस्थान

निम्नलिखित हेतु केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित निधियाँ:

  • वन - रोपण
  • ग्रामीण विकास

केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित और अधिसूचित की गई राष्ट्रीय शहरी गरीबी उन्मूलन निधि

 

नोट: इस धारा के अंतर्गत ₹ 2000/- से अधिक के नकद दान के संबंध में कोई कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी, अथवा यदि सकल कुल आय में व्यवसाय / पेशे से लाभ / अभिलाभ की आय शामिल है।।

 

धारा 80GGC

 

राजनीतिक दल या चुनावी न्यास में योगदान की गई राशि को कटौती की अनुमति है

(कुछ शर्तों के अधीन)

 

नकद के अलावा किसी अन्य ढंग से भुगतान की गई कुल राशि की कटौती

 

 

 

धारा 80IA

 

 

औद्योगिक पार्कों में संलग्न उपक्रम (कोई भी उपक्रम) तथा कोई भी विद्युत उपक्रम कटौती का दावा करने के हकदार होंगे (कुछ शर्तों के अधीन)।

 

लगातार 10 निर्धारण वर्षों हेतु लाभ का 100% , जो 15 निर्धारण वर्षों की अवधि के भीतर आते हों।

(यदि विनिर्दिष्ट व्यवसाय हेतु विकास, संचालन आदि विनिर्दिष्ट तिथियों के बाद प्रारंभ किए गए हों, तो कोई कटौती अनुमन्य नहीं होगी।)

 

 

 

धारा 80IAB

 

 

विशेष आर्थिक क्षेत्र के विकास में लगे उपक्रम या उद्यम द्वारा लाभ और अभिलाभ के संबंध में कटौती

(कुछ शर्तों के अधीन)

 

केंद्र सरकार द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) अधिसूचित किए जाने वाले वर्ष से प्रारंभ होने वाले 15 निर्धारण वर्षों में से लगातार 10 निर्धारण वर्षों हेतु लाभ का 100%

किसी ऐसे निर्धारिती को कोई कटौती नहीं, जहां विशेष आर्थिक परिक्षेत्र का विकास 1 अप्रैल 2017 को या उसके बाद शुरू होता है

 

 

धारा 80IAC

 

विनिर्दिष्ट कारोबार से एक योग्य स्टार्ट-अप द्वारा प्राप्त लाभ और अभिलाभ

पात्र स्टार्ट-अप के निगमित (इनकॉर्पोरेटेड) होने के वर्ष से प्रारंभ होने वाले 10 कर निर्धारण वर्षों (AY) में से लगातार 3 कर निर्धारण वर्षों के लिए लाभ का 100%

 

 

 

धारा 80IB

 

आधारभूत संरचना विकास उपक्रमों के अतिरिक्त निर्दिष्ट औद्योगिक उपक्रमों से लाभ और अभिलाभ के संबंध में कटौती - विहित प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किए जाने वाले निर्धारण वर्ष से 10 वर्षों हेतु लाभ का 100% (यदि 31 मार्च 2000 के बाद किन्तु 1 अप्रैल 2007 से पूर्व स्वीकृत किया गया हो)।

इस धारा के तहत कटौती ऐसे निर्धारिती को उपलब्ध है जिसकी सकल कुल आय में निम्नलिखित व्यवसाय से प्राप्त कोई लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हो:

जम्मू और कश्मीर में लघु उद्योग सहित औद्योगिक उपक्रम

खनिज तेल का वाणिज्यिक उत्पादन और शोधन

फलों अथवा सब्जियों, मांस और मांस उत्पादों अथवा मुर्गी पालन अथवा समुद्री अथवा डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण, संरक्षण तथा पैकेजिंग

खाद्यान्नों के प्रबंधन, भंडारण तथा परिवहन का एकीकृत व्यवसाय

(कुछ शर्तों के अधीन)

 

विभिन्न प्रकार के उपक्रमों हेतु विनिर्दिष्ट शर्तों के अनुसार 5 / 10 / 7 वर्षों हेतु लाभ का100% / 25%

 

 

धारा 80IBA

 

आवासीय परियोजनाओं के विकास और निर्माण से प्राप्त लाभ और अभिलाभ

विनिर्दिष्ट विभिन्न शर्तों के अधीन लाभ का100%

 

 

 

धारा 80IC

 

हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तरांचल तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों में कुछ उपक्रमों के संबंध में कटौती

(कुछ शर्तों के अधीन)

विनिर्दिष्ट वस्तु अथवा चीज़ के विनिर्माण अथवा उत्पादन हेतु प्रथम 5 निर्धारण वर्षों के लिए लाभ का 100% तथा अगले 5 निर्धारण वर्षों के लिए 25% (कंपनी हेतु 30%)

 

 

 

धारा 80IE

 

उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्थापित कुछ उपक्रमों हेतु कटौती

(कुछ शर्तों के अधीन)

विनिर्दिष्ट विभिन्न शर्तों के अधीन 10 निर्धारण वर्षों हेतु लाभ का100%

 

 

धारा 80JJA

 

जैव-अपघटनीय अपशिष्ट के संग्रहण तथा प्रसंस्करण के व्यवसाय से लाभ और अभिलाभ के संबंध में कटौती

(कुछ शर्तों के अधीन)

जैव-अपघटनीय अपशिष्ट के संग्रहण, प्रसंस्करण तथा उपचार की गतिविधि से लगातार 5 निर्धारण वर्षों हेतु लाभ का 100%

 

 

धारा 80JJAA

 

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AB लागू होने वाले निर्धारिती हेतु नए श्रमिकों / कर्मचारियों के नियोजन के संबंध में कटौती

(कुछ शर्तों के अधीन)

कुछ शर्तों के अधीन 3 निर्धारण वर्षों हेतु अतिरिक्त कर्मचारी लागत का30%

 

 

धारा 80LA

 

अपतटीय बैंकिंग इकाइयों तथा अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र की आय हेतु कटौती

(कुछ शर्तों के अधीन)

विनिर्दिष्ट शर्तों के अनुसार 5 / 10 निर्धारण वर्षों हेतु विनिर्दिष्ट आय का 100% / 50%

 

 

 

पृष्ठ की अंतिम बार समीक्षा की गई या अपडेट किया गया: