अनिवासी
अनिवासी पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या आयकर अधिनियम, 2025 के तहत व्यक्तियों के लिए आवासीय स्थिति के मूल परीक्षण में परिवर्तन हुआ है?
किसी व्यक्ति की आवासीय स्थिति निर्धारित करने की मूल शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 6 के तहत कोई व्यक्ति कर-निवासी माना जाता रहेगा, यदि वह सुसंगत कर वर्ष में भारत में 182 दिन अथवा उससे अधिक अवधि तक रहता है, अथवा उस वर्ष में 60 दिन अथवा उससे अधिक तथा उससे पूर्ववर्ती चार वर्षों में कुल 365 दिन अथवा उससे अधिक अवधि तक भारत में रहा हो। ये शर्तें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6(1) के समरूप हैं।
2. क्या 1961 के अधिनियम के तहत उपलब्ध वह विशेष छूट आयकर अधिनियम, 2025 में भी लागू है, जिसके अनुसार भारत का वह नागरिक जो भारत से बाहर रोजगार हेतु या भारतीय जहाज़ के चालक दल के सदस्य के रूप में भारत छोड़ता है, केवल तभी निवासी माना जाता है जब वह भारत में 182 दिन या उससे अधिक अवधि तक ठहरता है?
हाँ, यह विशेष छूट बिना किसी परिवर्तन के जारी है। यदि भारत का कोई नागरिक नौकरी के लिए भारत से बाहर जाता है अथवा भारतीय जहाज के कर्मी दल के सदस्य के रूप में कार्य करता है, तो उसे केवल तभी निवासी समझा जाएगा जब वह सुसंगत कर वर्ष के दौरान भारत में 182 दिन या उससे अधिक अवधि तक ठहरा हो। ऐसे मामलों में, सुसंगत कर वर्ष
में 60 दिनों के ठहराव तथा उससे पूर्व के चार कर वर्षों में 365 दिनों के ठहराव की शर्त लागू नहीं होती।
3. क्या भारत आने वाले भारतीय नागरिकों अथवा भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए नियमों में नए अधिनियम के तहत कोई संशोधन किया गया है?
नहीं। आयकर अधिनियम, 2025 के तहत यह नियम समान बना हुआ है। भारत आने वाला भारतीय नागरिक अथवा भारतीय मूल का व्यक्ति उस कर वर्ष में ‘निवासी’ माना जाएगा, यदि वह उस कर वर्ष में कुल 182 दिनों से अधिक अवधि तक भारत में रहता है। जिन व्यक्तियों की कर वर्ष के दौरान (विदेशी स्रोतों से आय को छोड़कर) ₹ 15 लाख से अधिक आय है, उनके लिए नए अधिनियम की धारा 6(2)(b) के तहत वैकल्पिक शर्त भी संशोधन सहित लागू होती है, जिसमें उक्त धारा में ‘60 दिन’ को ‘120 दिन’ पढ़ा जाएगा, साथ ही ऐसे कर वर्ष से पूर्ववर्ती चार वर्षों में 365 दिन अथवा उससे अधिक अवधि का भारत में ठहराव भी आवश्यक होगा।
4. ‘निवासी माना जाना’ से क्या अभिप्राय है? क्या आयकर अधिनियम, 1961 के ‘मानी गई आवासीय स्थिति’ संबंधी प्रावधान में कोई परिवर्तन हुआ है?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6(1A) के अनुसार, भारत का वह नागरिक जिसकी कुल आय ₹ 15 लाख से अधिक है (विदेशी स्रोतों से आय को छोड़कर) तथा जो अधिवास, निवास अथवा समान मानदंडों के आधार पर किसी अन्य देश में कर देय नहीं है, उसे मानी गई आवासीय स्थिति वाला निवासी माना जाता है। मानी गई आवासीय स्थिति का यह नियम आयकर अधिनियम, 2025 में भी यथावत रखा गया है। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 6(7), आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6(1A) के समान है। इस स्थिति में भारत में ठहरने के दिनों की संख्या का कोई महत्व नहीं है।
5. क्या नए अधिनियम के तहत ‘सामान्यतः निवासी नहीं’ (एन.ओ.आर.) की अवधारणा में कोई परिवर्तन किया गया है?
एन.ओ.आर. के मानदंडों में कोई संशोधन नहीं किया गया है। कोई व्यक्ति किसी कर वर्ष में ‘सामान्यतः निवासी नहीं’ माना जाता रहेगा, यदि वह पूर्ववर्ती दस वर्षों में से नौ वर्षों में अनिवासी रहा हो अथवा पूर्ववर्ती सात वर्षों में 729 दिन या उससे कम अवधि तक भारत में ठहरा हो। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 6(13), आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6(6) के समान है।
6. क्या आयकर अधिनियम, 2025 के तहत किसी कंपनी के लिए निवास परीक्षण में कोई परिवर्तन हुआ है?
नहीं, आयकर अधिनियम, 2025 के तहत किसी कंपनी के लिए निवास परीक्षण में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। आयकर अधिनियम, 1961 तथा आयकर अधिनियम, 2025 दोनों के तहत कोई कंपनी भारत में निवासी मानी जाती है, यदि वह भारतीय कंपनी है अथवा संबंधित वर्ष के दौरान उसका प्रभावी प्रबंधन स्थान (पी.ओ.ई.एम) भारत में है।
7. 1 अप्रैल 2026 से पूर्व के कर वर्षों के लिए आवासीय स्थिति का निर्धारण किस कानून के तहत किया जाएगा?
1 अप्रैल 2026 से पूर्व प्रारम्भ होने वाले किसी भी कर वर्ष के लिए आवासीय स्थिति का निर्धारण आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6 के तहत ही किया जाता रहेगा, भले ही निर्धारण अथवा पुनर्निर्धारण आयकर अधिनियम, 2025 के प्रवर्तन के पश्चात किया जाए। यह बचाव खंड के कारण है, जो पूर्ववर्ती कर वर्षों से संबंधित सभी कार्यवाहियों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की प्रयोज्यता को बनाए रखता है।
8. यदि ए.वाई. 2025-26 के लिए 1 अप्रैल 2026 के पश्चात पुनः निर्धारण आरंभ किया जाता है, तो किसी व्यक्ति की कर-आवासीय स्थिति के निर्धारण के लिए कौन-से प्रावधान लागू होंगे?
यदि ए.वाई. 2025-26 के लिए 1 अप्रैल 2026 के पश्चात पुनः निर्धारण के लिए सूचना जारी की जाती है, तब भी आवासीय स्थिति का निर्धारण आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6 के तहत ही सख्ती से किया जाएगा, क्योंकि संबंधित कर वर्ष 1 अप्रैल 2026 से पूर्व आरंभ होता है। नए अधिनियम की धारा 536 स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है कि ऐसे वर्षों से संबंधित कार्यवाहियाँ पुराने अधिनियम के तहत इस प्रकार संचालित की जाएँगी मानो नया अधिनियम अधिनियमित ही न हुआ हो। अतः 1 अप्रैल 2026 से पूर्व आरंभ होने वाले किसी भी कर वर्ष की कर-आवासीय स्थिति के निर्धारण में आयकर अधिनियम, 2025 का कोई प्रयोग नहीं होगा।
9.आवासीय स्थिति आयकर अधिनियम, 2025 के तहत किस वर्ष से विनियमित होगी?
आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 6 के तहत आवासीय स्थिति केवल उन कर वर्षों पर लागू होगी जो 1 अप्रैल 2026 को अथवा उसके पश्चात आरंभ होते हैं। ऐसे वर्षों के लिए निवासी, अनिवासी, मान्य निवासी तथा साधारणतया निवासी नहीं की स्थिति का निर्धारण पूर्णतः नए अधिनियम के तहत किया जाएगा। एक ही कर वर्ष के लिए दोनों अधिनियमों का अतिव्याप्त प्रयोग नहीं होगा। विभाजन का आधार कर वर्ष के प्रारम्भ की तिथि है, न कि कार्यवाहियों की तिथि।
10. यदि किसी व्यक्ति का भारत में ठहराव ऐसी समयावधि में फैला हो जहाँ दोनों अधिनियम प्रभावी हों, तो उसकी आवासीय स्थिति का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा?
आवासीय स्थिति का निर्धारण प्रत्येक कर वर्ष के लिए पृथक रूप से किया जाता है। जहाँ किसी व्यक्ति का भारत में ठहराव वित्तीय वर्ष 2025–26 तथा 2026–27 तक विस्तृत हो, वहाँ एफ़.वाई. 2025–26 (ए.वाई. 2026–27) के लिए कर-आवासीय स्थिति का निर्धारण 31 मार्च 2026 तक की ठहराव अवधि के आधार पर, आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
एफ़.वाई. 2026–27 के लिए आवासीय स्थिति का निर्धारण आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के तहत किया जाएगा तथा 1 अप्रैल 2026 से आगे की ठहराव अवधि को इस प्रयोजन के लिए विचार में लिया जाएगा। तथापि, “60 दिन (सुसंगत कर वर्ष में ठहराव) + 365 दिन (पूर्ववर्ती चार कर वर्षों में ठहराव)” परीक्षण लागू करते समय, सुसंगत रूप से एफ़.वाई. 2025–26 तथा उससे पूर्व के वर्षों की ठहराव अवधि को भी ध्यान में रखा जाएगा।
11. क्या निरसन का प्रभाव ‘सामान्यतः निवासी नहीं’ स्थिति से संबंधित निरंतरता की शर्तों पर पड़ेगा?
नहीं, “पूर्ववर्ती दस वर्षों में से नौ वर्ष” अथवा “पूर्ववर्ती सात वर्षों में 729 दिन” जैसे निरंतरता-आधारित परीक्षण पूर्ववर्ती वर्षों को ध्यान में रखते रहेंगे, भले ही वे वर्ष आयकर अधिनियम, 1961 के तहत विनियमित रहे हों। 01.04.2026 को अथवा उसके पश्चात आरंभ होने वाले कर वर्ष के लिए आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 6 लागू करते समय, पूर्ववर्ती वर्षों में निरसित अधिनियम के अंतर्गत आने वाले वर्ष भी सम्मिलित हो सकते हैं।
12. मानी गई आवासीय स्थिति का निरसन खण्ड के साथ किस प्रकार अंतर्संबंध है?
1 अप्रैल 2026 से पूर्व के कर वर्षों के लिए, ऐसे भारतीय नागरिकों की मान्य आवासीय स्थिति, जो अन्यत्र कर के लिए उत्तरदायी नहीं हैं तथा जिनकी आय ₹ 15 लाख से अधिक है, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6(1A) के तहत विनियमित होगी। 1 अप्रैल 2026 को अथवा उसके पश्चात आरंभ होने वाले कर वर्षों के लिए, आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 6(7) में निहित तदनुरूप मान्य आवासीय स्थिति संबंधी प्रावधान लागू होगा। निरसन खण्ड यह सुनिश्चित करता है कि पूर्ववर्ती वर्षों के लिए मान्य आवासीय स्थिति का परीक्षण नए प्रावधान के तहत नहीं की जा सकती।
13. यदि किसी व्यक्ति को किसी विशेष वर्ष के लिए आयकर अधिनियम, 1961 के तहत निवासी माना गया था, तो क्या उस स्थिति को आयकर अधिनियम, 2025 के तहत पुनः खोला जा सकता है?
नहीं, किसी कर वर्ष के लिए आयकर अधिनियम, 1961 के तहत एक बार निर्धारित की गई आवासीय स्थिति को केवल उसी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही पुनः खोला जा सकता है।
14. क्या आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115D, 115E तथा 115F में निहित अनिवासियों के लिए रियायती कर व्यवस्थाओं से संबंधित प्रावधानों में आयकर अधिनियम, 2025 के तहत कोई परिवर्तन हुआ है?
No. The core features of the special NRI taxation regime remain unchanged.
Under the Income Tax Act, 1961:
• Section 115D disallowed deduction of any expenditure or allowance while computing investment income of a Non -resident Indian (NRI) and restricted Chapter VI -A deductions where the gross total income consisted of such income.
• Section 115E provided for concessional tax rates of 20% on investment income and 10%/ 12.5% on long -term capital gains depending on the date of transfer.
• Section 115F granted exemption from capital gains where the net consideration from transfer of foreign exchange assets was reinvested in specified assets within six months, subject to a proportional exemption formula and a three -year lock-in period, along with a claw -back provision on premature transfer.
The corresponding Sections 213, 214 and 215 of the Income Tax Act, 2025 substantially reproduce these provisions. Thus, the restriction on deductions, concessional tax treatment, reinvestment exemption (including the formula A = B × C / D), lock -in conditi on, and claw -back mechanism have been retained under the new Act without material alteration.
15. क्या आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115G के तहत अनिवासियों को प्रदान की गई रिटर्न फ़ाइल करने से छूट को आयकर अधिनियम, 2025 में भी जारी रखा गया है?
हाँ। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115G के तहत ऐसे एन.आर.आई. को विवरणी फ़ाइल करने से छूट प्रदान की गई थी, जिनकी कुल आय केवल निवेश आय अथवा दीर्घकालिक पूँजी अभिलाभ अथवा दोनों से मिलकर बनी हो तथा जो टी.डी.एस.के अधीन हो। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 216 समरूप नियमों के साथ इस राहत को बनाए रखती है तथा अनुपालन सरलीकरण के दृष्टिकोण को जारी रखती है। सीमित आय प्रवर्ग तथा स्रोत पर उचित कर कटौती की शर्तें यथावत बनी हुई हैं।
16. क्या पुराने अधिनियम की धारा 115H के तहत निवासी बनने के पश्चात लाभों की निरंतरता को आयकर अधिनियम, 2025 में भी संरक्षित रखा गया है?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115H के तहत ऐसा एन.आर.आई. जो निवासी बन गया हो, उसे एक घोषणा पत्र फ़ाइल करने पर कुछ विदेशी मुद्रा संपत्तियों (शेयरों के अतिरिक्त) पर रियायती कराधान का लाभ जारी रखने की अनुमति दी गई थी। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 217 इस निरंतरता लाभ को संरक्षित रखती है। विवरणी के साथ घोषणा प्रस्तुत करने की आवश्यकता तथा परिसंपत्ति के स्थानांतरण अथवा परिवर्तन तक लाभ की निरंतरता यथावत बनी हुई है। तदनुसार, लाभों की निरंतरता वापस नहीं ली गई है।
17. क्या आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115-I के तहत एन.आर.आई. को विशेष रियायती व्यवस्था से बाहर निकलकर सामान्य प्रावधानों के तहत कराधान का विकल्प चुनने की अनुमति देने वाला वैकल्पिक तंत्र आयकर अधिनियम, 2025 में भी बनाए रखा गया है?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115-I के तहत किसी एन.आर.आई. को किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए विशेष रियायती व्यवस्था के अधीन न रहने तथा इसके स्थान पर सामान्य प्रावधानों के तहत कराधान का विकल्प चुनने की अनुमति थी। आयकर अधिनियम, 2025 इस वैकल्पिक तंत्र को बनाए रखता है, जिसके तहत निर्धारिती विवरणी में घोषणा कर सकता है कि विशेष प्रावधान लागू नहीं होंगे। ऐसी घोषणा किए जाने पर कराधान अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के तहत किया जाएगा। अतः विशेष व्यवस्था की स्वैच्छिक प्रकृति यथावत बनी हुई है।
18. यदि किसी एन.आर.आई. ने धारा 115-I (पुराना अधिनियम) के तहत रियायती व्यवस्था से बाहर निकलने का विकल्प चुना था, तो क्या वह विकल्प निरसन के पश्चात भी प्रभावी रहेगा?
हाँ, निरसन तथा बचत खण्ड आयकर अधिनियम, 1961 के तहत सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए विधिमान्यतः प्रयुक्त विकल्पों को संरक्षित रखते हैं। चूँकि धारा 115-I के तहत विकल्प वर्ष-विशिष्ट था, इसलिए उसका प्रभाव निरसन के पश्चात भी उस विशिष्ट वर्ष के लिए बना रहता है। आयकर अधिनियम, 2025 द्वारा विनियमित कर वर्षों के लिए तदनुरूप बाहर निकलने संबंधी प्रावधान भावी रूप से लागू होगा। निरसन पूर्व में प्रयुक्त किसी विकल्प को पूर्वप्रभाव से अमान्य नहीं करता। अतः प्रत्येक कर वर्ष की पृथक रूप से परीक्षा उस वर्ष पर लागू प्रयोज्य अधिनियम तथा निर्धारिती द्वारा चुने गए विकल्प के आधार पर की जाएगी।
19. किसी एन.आर.आई. ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115F के तहत छूट का दावा किया था। यदि वह 01.04.2026 के पश्चात (अर्थात् आयकर अधिनियम, 2025 के प्रारम्भ के बाद) किंतु तीन-वर्षीय लॉक-इन अवधि के भीतर नई परिसंपत्ति का स्थानांतरण करता है, तो क्लॉ-बैक प्रावधान के लिए कौन-सा अधिनियम लागू होगा?
यदि नई परिसंपत्ति का स्थानांतरण 01.04.2026 के पश्चात किंतु तीन-वर्षीय लॉक-इन अवधि के भीतर किया जाता है, तो क्लॉ-बैक दायित्व आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115F(2) के तहत उत्पन्न होगा, क्योंकि मूल छूट उसी प्रावधान के तहत प्रदान की गई थी। आयकर अधिनियम, 2025 का निरसन तथा बचत खण्ड उस छूट से संबंधित दायित्व, अधिकार तथा शर्तों को आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ही विनियमित बनाए रखता है। तथापि, कराधान का वर्ष वह कर वर्ष होगा जिसमें नई परिसंपत्ति का स्थानांतरण किया जाता है। यदि यह स्थानांतरण 01.04.2026 के पश्चात होता है, तो वह स्थानांतरण आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत आएगा तथा उस वर्ष का निर्धारण उसके प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
20. क्या निवासी बनने के पश्चात रियायती कराधान जारी रखने हेतु आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115H के तहत किसी एन.आर.आई. द्वारा फ़ाइल की गई घोषणा आयकर अधिनियम, 2025 के तहत भी मान्य रहेगी?
जहाँ किसी एन.आर.आई. ने निवासी बनने के पश्चात रियायती कराधान जारी रखने हेतु आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115H के तहत घोषणा फ़ाइल की थी, ऐसी घोषणा आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(f) में उपबंधित अनुसार नए अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्य घोषणा मानी जाएगी।
21. पुराने अधिनियम के निरसन के पश्चात धारा 115C–115I से संबंधित लंबित निर्धारण अथवा पुनः निर्धारणों का किस प्रकार निपटान किया जाएगा?
आयकर अधिनियम, 1961 द्वारा विनियमित कर वर्षों से संबंधित निर्धारण उस अधिनियम के तहत बचत खण्ड के कारण जारी रहेंगे। निरसन पुराने अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरंभ की गई पूर्ण कार्यवाहियों अथवा लंबित पुनः निर्धारण कार्यवाहियों को अमान्य नहीं करता। अतः रियायती दरों, धारा 115D के तहत कटौती से इनकार अथवा धारा 115F के तहत छूट से संबंधित विवादों का उन वर्षों के लिए पुराने अधिनियम के तहत ही निर्णय किया जाएगा। नया अधिनियम केवल 1 अप्रैल 2026 को अथवा उसके पश्चात आरंभ होने वाले कर वर्षों पर भावी रूप से लागू होगा।
22. क्या पुराने प्रावधानों के तहत अर्जित आस्तियों (अस्सेट्स) के लिए “विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति” की परिभाषा पर निरसन का कोई प्रभाव पड़ता है?
नहीं, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115C के तहत “विदेशी विनिमय आस्तियों” के रूप में अर्जित आस्तियाँ पूर्ववर्ती वर्षों के कराधान के प्रयोजनों के लिए अपना स्वरूप प्रतिधारित रखती हैं। चूँकि आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 212 के तहत समरूप परिभाषाएँ अपनाई गई हैं, इसलिए वर्गीकरण में कोई विच्छिन्नता नहीं है। बचत खण्ड यह सुनिश्चित करता है कि पुराने कानून के तहत निर्धारित आस्तियों का वर्गीकरण तथा कर उपचार विधिमान्य बना रहे।
23. क्या आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(4)(ii) के तहत एन.आर.ई. खाते पर अर्जित ब्याज पर उपलब्ध छूट को आयकर अधिनियम, 2025 में भी बनाए रखा गया है?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(4)(ii) के तहत एफ.ई.एम.ए. के अनुसार अनिवासी (बाह्य) खाते (एन.आर.ई खाता) से किसी व्यक्ति द्वारा अर्जित ब्याज को छूट प्रदान की गई थी, बशर्ते वह व्यक्ति एफ.ई.एम.ए. के अनुसार “भारत से बाहर निवासी व्यक्ति” हो अथवा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ऐसा खाता बनाए रखने की अनुमति हो। आयकर अधिनियम, 2025 में इस छूट को अनुसूची IV में बनाए रखा गया है। मौलिक शर्तें यथावत हैं — पात्रता एफ.ई.एम.ए. के तहत अनिवासी स्थिति तथा भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति पर निर्भर करती है। इस छूट को न तो वापस लिया गया है और न ही इसमें कोई ढील दी गई है।
24. क्या आयकर अधिनियम, 2025 पुराने अधिनियम की धारा 10(4)(ii) के तहत एफ.ई.एम.ए. की आवासीय स्थिति तथा आयकर छूट के मध्य संबंध में कोई परिवर्तन करता है?
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत पुराने अधिनियम की धारा 10(4)(ii) में उपलब्ध छूट आयकर अधिनियम के तहत कर-निवास के बजाय एफ.ई.एम.ए. के अनुसार “भारत से बाहर निवासी व्यक्ति” की परिभाषा पर आधारित थी। आयकर अधिनियम, 2025 भी इस भिन्नता को यथावत बनाए रखता है।
25. क्या आयकर अधिनियम, 2025 आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 48 के पहले परंतुक के तहत उपबंधित उस तंत्र को प्रतिधारित रखता है, जिसके अंतर्गत अनिवासियों को शेयरों अथवा डिबेंचरों पर पूँजी अभिलाभ की संगणना मूल विदेशी मुद्रा में करने तथा उसे पुनः परिवर्तित करने की अनुमति थी?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 48 के पहले परंतुक के तहत भारतीय कम्पनी के शेयरों अथवा डिबेंचरों के स्थानांतरण पर पूँजी अभिलाभ की संगणना करने वाले अनिवासियों को उसी विदेशी मुद्रा में अभिलाभ की संगणना करने की अनुमति थी, जिसमें निवेश किया गया था, तथा शुद्ध अभिलाभ को भारतीय मुद्रा में पुनः परिवर्तित किया जाता था। इससे विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के प्रभाव का निराकरण होता था। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 72 अनिवासियों के लिए इस तंत्र को बनाए रखती है।