हानियों को समायोजित/अग्रेषित करना
हानियों को समायोजित/अग्रेषित करना पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या आयकर अधिनियम, 1961 के तहत संगणित की गई हानियों को आयकर अधिनियम, 2025 के तहत अग्रानीत किया जा सकता है?
हाँ। यह स्थिति आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536 में निहित निरसन एवं संरक्षण प्रावधानों में स्पष्ट रूप से स्पष्ट की गई है। धारा 536(2) के खंड (m) एवं (n) के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से पूर्व प्रारंभ होने वाले कर वर्षों से संबंधित अग्रेषित हानियों को नए अधिनियम के अंतर्गत भी आगे ले जाया तथा समायोजित किया जाएगा, और यह प्रक्रिया निरस्त अधिनियम के संगत प्रावधानों के अनुसार ही होगी।
उदाहरण: आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत निर्धारण वर्ष 2023–24 की पात्र व्यावसायिक हानि को आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत आगे ले जाया जा सकता है। तथापि, हानि को आगे ले जाने की कुल अवधि 2023–24 से गणना की गई मूल आठ वर्ष की सीमा से अधिक नहीं हो सकती।
2. क्या पुराने अधिनियम के तहत "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत अग्रानीत हानियाँ, नए अधिनियम के तहत अभी भी समायोजित की जा सकती हैं?
हाँ। 1 अप्रैल 2026 से पहले के वर्षों में गृह संपत्ति से हुई हानि को नए अधिनियम के तहत समायोजित और अग्रानीत किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे पुराने अधिनियम की धारा 71B में बताया गया है।
उदाहरण के लिए, अगर श्रीमती R को निर्धारण वर्ष 2024-25 में गृह संपत्ति हानि हुई है, तो नए अधिनियम के तहत उस हानि को बाद के वर्षों में गृह संपत्ति से होने वाली आय के साथ समायोजित किया जा सकता है।
3. क्या नए आयकर अधिनियम में पुराने अधिनियम के अंतर्गत अग्रेषित व्यावसायिक हानियों के समायोजन के संबंध में कोई प्रावधान है?
हाँ। 1 अप्रैल 2026 से पहले के वर्षों की व्यावसायिक हानियों को नए अधिनियम के तहत पुराने अधिनियम की धारा 72 में बताए गए तरीके से केवल व्यावसायिक आय के विरुद्ध समायोजन और अग्रानीत किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी करदाता की निर्धारण वर्ष 2023–24 की व्यावसायिक हानि का समायोजन, निर्धारित शर्तों की पूर्ति के अधीन, नए अधिनियम के अंतर्गत कर वर्ष 2026–27 की उसकी व्यावसायिक आय के विरुद्ध किया जा सकता है।
4. पुराने वर्षों की अग्रेषित पूंजीगत हानियों (दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक दोनों) को नए अधिनियम के अंतर्गत किस प्रकार माना जाएगा?
उन्हें नए अधिनियम के अंतर्गत गणना किए गए पूंजीगत लाभ के विरुद्ध अग्रानीत तथा समायोजित किया जा सकता है, किन्तु केवल उसी प्रकार जिस प्रकार पुराने अधिनियम के अंतर्गत इसकी अनुमति थी।
उदाहरण के लिए, यदि किसी करदाता को निर्धारण वर्ष 2024–25 में दीर्घकालिक पूंजीगत हानि हुई थी, तो वह पुराने अधिनियम में निर्धारित शर्तों के अनुसार आगामी वर्षों में प्राप्त अपने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के विरुद्ध उस हानि का समायोजन कर सकता है।
5. यदि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 72A के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024–25 में किसी कंपनी का समामेलन हुआ हो और निर्धारित शर्तों का उल्लंघन वित्तीय वर्ष 2026–27 में किया जाए, तो ऐसे उल्लंघन की कर-योग्यता किस अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित की जाएगी?
यदि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 72A के अंतर्गत निर्धारित वैधानिक शर्तों—जैसे व्यवसाय का निरंतर संचालन या निर्धारित स्तर की परिसंपत्तियों का अनुरक्षण—का उल्लंघन 1 अप्रैल, 2026 या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी कर वर्ष (उदाहरणार्थ, वित्तीय वर्ष 2026–27) में किया जाता है, तो ऐसे उल्लंघन के परिणामों का निर्धारण आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(o) के अंतर्गत किया जाएगा। यदि 1 अप्रैल 2026 से पूर्व आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 72A के अंतर्गत किसी हानि या अवक्षयण भत्ते का समायोजन किया गया था और बाद में निर्धारित शर्तों का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(o) के अनुसार, समायोजित की गई वह राशि उल्लंघन वाले कर वर्ष में समामेलित अथवा उत्तराधिकारी संस्था की आय मानी जाएगी। तदनुसार, कर वर्ष 2026–27 में उत्पन्न ऐसी मान्य आय पर आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार कर लगाया जाएगा।
6. क्या आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत गणना की गई हानियाँ आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत अपनी मूल प्रकृति में संरक्षित रहती हैं, अथवा नया अधिनियम उन्हें विभिन्न आय शीर्षों के अंतर्गत पुनर्वर्गीकृत करता है?
The Income Tax Act, 2025 does not reclassify losses determined under the Income Tax Act, 1961 into different heads of income. Section 536 (repeal and saving clause) explicitly preserves the original character of such losses. Under sections 536(2)(m) and (n ), losses retain their original nature —business, speculation, capital, etc.—and are carried forward and set off as per the corresponding provisions of the repealed Act. Thus, old losses are not converted or re -characterised; only their carry forward a nd set‑off continues under the corresponding head in the 2025 Act
7. यदि निर्धारण वर्ष 2024–25 के लिए हानि विवरणी आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत विलंब से फ़ाइल की गई थी, तो क्या ऐसी हानि को आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत अग्रानीत किया जा सकता है?
नहीं। यदि निर्धारण वर्ष 2024–25 के लिए हानि दर्शाने वाली आयकर विवरणी विलंब से फ़ाइल की गई थी और उसने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(3) को धारा 80 के साथ पढ़े जाने पर निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया था, तो ऐसी हानि अग्रानीत नहीं की जा सकती। चूँकि संबंधित कर वर्ष 1 अप्रैल 2026 से पूर्व का है, इसलिए हानि को आगे ले जाने की पात्रता पूर्णतः आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होगी। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536 में निहित निरसन एवं संरक्षण प्रावधान केवल वैध रूप से निर्धारित हानियों को ही संरक्षित रखते हैं तथा वे न तो किसी त्रुटि का निराकरण करते हैं और न ही किसी अयोग्य दावे को पुनर्जीवित करते हैं। अतः जो हानियाँ आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत अग्रेषण के लिए पात्र नहीं थीं, उन्हें आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत भी अग्रानीत नहीं किया जा सकता।
8. क्या आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत अप्रकटित आय के विरुद्ध हानियों के समायोजन पर लगाए गए प्रतिबंध में कोई परिवर्तन किया गया है?
नहीं। सिद्धांततः यह प्रतिबंध यथावत् बना हुआ है। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 120 के अनुसार, तलाशी, अभिग्रहण अथवा सर्वेक्षण की कार्यवाही के परिणामस्वरूप करदाता की कुल आय में सम्मिलित अप्रकटित आय के विरुद्ध अग्रेषित हानियों और/अथवा अवशोषित न हो सकी शेष राशि के समायोजन की अनुमति नहीं है। यह प्रावधान आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 79A के समान है।
9. क्या पुराने अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत उपलब्ध निर्दिष्ट बचत साधनों पर मूल कटौती में आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत कोई परिवर्तन किया गया है?
नहीं। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123 के अंतर्गत व्यक्तियों एवं एच.यू.एफ. के लिए निर्दिष्ट बचत साधनों पर ₹1.5 लाख की कुल कटौती को यथावत् रखा गया है। यह प्रावधान संरचनात्मक रूप से आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C तथा धारा 80CCE के समान है। यद्यपि पात्र निवेश साधनों को अब अनुसूची XV में स्थान दिया गया है, तथापि जीवन बीमा, भविष्य निधि, शिक्षण शुल्क आदि जैसी पात्र भुगतानों की प्रकृति में मूलतः कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
10. क्या करदाता/निर्धारिती नई कर व्यवस्था के अंतर्गत आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123 के तहत कटौती का दावा कर सकता है?
नहीं। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123 के अंतर्गत उपलब्ध कटौती का लाभ करदाता को धारा 202 के अंतर्गत निर्धारित नई रियायती कर व्यवस्था का विकल्प चुनने की स्थिति में प्राप्त नहीं होगा।
11. क्या आयकर अधिनियम, 2025 के अध्याय VIII के भाग C के अंतर्गत कटौतियों का दावा करने के लिए आयकर विवरणी का समय पर प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है, भले ही आय अन्यथा कटौती के लिए पात्र हो?
हाँ। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 122(5) के अनुसार, अध्याय VIII के भाग C के अंतर्गत कटौतियों का दावा करने के लिए निर्धारित नियत तिथि के भीतर आयकर विवरणी फ़ाइल करना एक कानूनी पूर्व-शर्त है, भले ही संबंधित आय अन्यथा कटौती के लिए पात्र हो। यह प्रावधान पुराने अधिनियम की धारा 80AC में निहित विधायी नीति को आगे बढ़ाता है, जिसके अनुसार आयकर विवरणी को निर्धारित समय-सीमा के भीतर फ़ाइल करना कटौती के अधिकार का एक अभिन्न एवं अनिवार्य तत्व है।
12. यदि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80-IA के अंतर्गत किसी करदाता को लाभ-आधारित कटौती कुछ वर्षों के लिए अनुमत थी, तो क्या वह 1 अप्रैल 2026 के बाद भी उसका दावा कर सकता है?
हाँ, लेकिन केवल शेष अवधि के लिए और उसी प्रकार, जैसा कि मूल आयकर अधिनियम, 1961 में प्रावधानित था। आयकर अधिनियम, 2025 में विशेष संक्रमणकालीन प्रावधान (जैसे धारा 138, 139, 141, 142 आदि) हैं, जो पात्र व्यवसायों के संबंध में कटौतियों को जारी रखने की अनुमति देते हैं, बशर्ते कि यदि आयकर अधिनियम, 1961 निरस्त न हुआ होता, तो करदाता उसके अंतर्गत पात्र बना रहता। यह कटौती नए अधिनियम के अंतर्गत नए सिरे से प्रदान नहीं की जाती, बल्कि पुराने अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध कटौती की निरंतरता के रूप में अनुमत होती है।
यह निरंतरता निर्धारित अवधि तक ही सीमित है। यदि आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत यह कटौती लगातार दस वर्षों के लिए उपलब्ध थी, तो निर्धारिती 1 अप्रैल 2026 के बाद शेष वर्षों के लिए उसी प्रकार कटौती का दावा कर सकता है, जैसा कि पुराने अधिनियम के अंतर्गत किया जा सकता था। तथापि, यह लाभ उस कानूनी अवधि से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
13. यदि आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत दावा की गई किसी कटौती से संबंधित शर्तों का उल्लंघन 1 अप्रैल 2026 के बाद किया जाता है, तो उसके कर संबंधी परिणाम किस अधिनियम के अंतर्गत उत्पन्न होंगे?
यह मुद्दा विशेष रूप से आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(h) (निरसन एवं संरक्षण प्रावधान) द्वारा विनियमित है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि निरस्त अधिनियम के अंतर्गत किसी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में किसी राशि को कुल आय में शामिल किया जाना आवश्यक होता, तो वही राशि उस कर वर्ष में, जिसमें उल्लंघन हुआ है, निर्धारिती की आय मानी जाएगी तथा उसे उसी आय शीर्ष के अंतर्गत शामिल किया जाएगा, जिसके अंतर्गत उसे निरस्त अधिनियम के तहत शामिल किया जाता।
14. क्या आयकर अधिनियम, 1961 के अध्याय VI-A के अंतर्गत कटौतियों से संबंधित लंबित अपीलें, निर्धारण, पुनर्निर्धारण अथवा अन्य कार्यवाहियाँ पुराने अधिनियम के अंतर्गत ही जारी रहेंगी?
हाँ। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(c) स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है कि आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने की तिथि पर लंबित कार्यवाहियाँ अथवा 1 अप्रैल 2026 से पूर्व प्रारंभ होने वाले कर वर्षों से संबंधित उसके बाद आरंभ की गई कार्यवाहियाँ, निरस्त अधिनियम के प्रावधानों द्वारा ही शासित होंगी। इसमें निर्धारण, पुनर्निर्धारण, संशोधन, पुनरीक्षण, दंडात्मक कार्यवाही तथा अपीलीय कार्यवाही शामिल हैं। अतः यदि धारा 80P या धारा 80-IA के अंतर्गत कटौती की अस्वीकृति से संबंधित कोई अपील लंबित है, तो उसका निर्णय आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार किया जाएगा। इसी प्रकार, यदि अध्याय VI-A के अंतर्गत कोई कटौती गलत रूप से प्रदान की गई थी, तो उसके संबंध में पुनः निर्धारण की कार्यवाही, अधिनियम के निरस्त हो जाने के बावजूद, आयकर अधिनियम, 1961 के ढाँचे के अंतर्गत आरंभ की जा सकती है।
15:. यदि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80-IBA के अंतर्गत पात्र कोई आवासीय परियोजना 01.04.2026 के बाद भी जारी रहती है, तो क्या उसके संबंध में कटौती का दावा किया जा सकता है?
हाँ। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 142 के अधीन, ऐसी कटौती उन कर वर्षों के लिए उपलब्ध रहेगी, जिनके लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80-IBA के अंतर्गत कटौती अनुमेय होती, मानो वह अधिनियम निरस्त न किया गया हो। अतः यदि कोई आवासीय परियोजना आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80-IBA के अंतर्गत विधिवत पात्र थी, तो मूल प्रावधान में निर्धारित सभी शर्तों की पूर्ति होने पर शेष अवधि के लिए कटौती का दावा जारी रखा जा सकता है। कटौती की गणना एवं पात्रता का निर्धारण निरस्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार होगा, जबकि कटौती आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 142 के अंतर्गत प्रदान की जाएगी।
16. यदि आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत किसी विकल्प या घोषणा का प्रयोग किया गया था, तो क्या वह अधिनियम के निरस्त होने के बाद भी प्रभावी रहेगी?
हाँ, आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(f) के अधीन। यह प्रावधान कहता है कि आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत किया गया कोई भी निर्वाचन, घोषणा या विकल्प, जो आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने से ठीक पहले प्रभावी था, उसे नए अधिनियम के संगत प्रावधान के अंतर्गत किया गया माना जाएगा। अतः जहाँ नए अधिनियम में समान या समकक्ष प्रावधान उपलब्ध है, वहाँ ऐसे निर्वाचन, घोषणा या विकल्प की निरंतरता बनी रहती है।
हालाँकि, यदि आयकर अधिनियम, 2025 में कोई समकक्ष प्रावधान उपलब्ध नहीं है, तो पूर्व में प्रयोग किया गया विकल्प संरक्षण प्रावधान द्वारा सुरक्षित सीमा से परे स्वतंत्र रूप से प्रभावी नहीं रह सकता। यह विधिक कल्पना केवल उसी सीमा तक लागू होती है, जहाँ नए अधिनियम में संबंधित कानूनी ढाँचा विद्यमान हो।
17. क्या पुराने अधिनियम के निरस्त होने से, यदि व्यावसायिक आय की गणना आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत की जा रही हो, तो कटौती की गणना के आधार पर कोई प्रभाव पड़ सकता है?
हाँ। 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद प्रारंभ होने वाले कर वर्षों के लिए व्यावसायिक आय की गणना आयकर अधिनियम, 2025 के अनुसार की जाएगी, भले ही कटौती का अधिकार आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत संरक्षित प्रावधानों से प्राप्त होता हो। यद्यपि कटौती की पात्रता पुराने अधिनियम के संरक्षित प्रावधानों से निर्धारित हो सकती है, किन्तु कटौती के लिए पात्र लाभ की राशि का निर्धारण नए अधिनियम की गणना व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा। सरल शब्दों में, कटौती का अधिकार पुराने अधिनियम से प्राप्त हो सकता है, लेकिन जिस लाभ पर कटौती की गणना की जाएगी, उसका निर्धारण नए अधिनियम के अनुसार होगा।
उदाहरण: मान लीजिए कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80-IA के अंतर्गत पात्र किसी अंडरटेकिंग के लिए 01.04.2026 के बाद भी कटौती के दो वर्ष शेष हैं। वित्तीय वर्ष 2027–28 के लिए उसकी व्यावसायिक आय की गणना आयकर अधिनियम, 2025 के अनुसार की जाती है। यदि नए अधिनियम के अंतर्गत पुनर्गणना के बाद व्यावसायिक लाभ ₹8 करोड़ निकलता है, जबकि पुराने अधिनियम के अनुसार यह ₹8.5 करोड़ होता, तो कटौती ₹8 करोड़ पर ही उपलब्ध होगी, ₹8.5 करोड़ पर नहीं।
18. यदि किसी अंडरटेकिंग ने अधिनियम के निरस्त होने से पूर्व पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं किया था, लेकिन आयकर अधिनियम, 2025 में उसी प्रकार का प्रावधान मौजूद है, तो क्या 01.04.2026 के बाद कटौती का दावा किया जा सकता है?
हाँ, लेकिन केवल तभी जब अंडरटेकिंग आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत नए सिरे से सत्यापन पर पात्रता की शर्तों को स्वतंत्र रूप से पूरा करता हो। यदि नए अधिनियम में कोई समरूपी या समान कटौती प्रावधान मौजूद है, तो करदाता के दावे की जाँच आयकर अधिनियम, 2025 में निर्धारित शर्तों के अनुसार की जाएगी। ऐसी स्थिति में यह दावा पुराने अधिकार की निरंतरता नहीं माना जाएगा, बल्कि नए अधिनियम के अंतर्गत किया गया एक नया दावा होगा। संबंधित कर वर्ष के लिए अंडरटेकिंग को आयकर अधिनियम, 2025 में निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा।
19. यदि आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत किसी कटौती को आंशिक रूप से अस्वीकृत कर दिया गया था और उस संबंध में अपील का निर्णय अधिनियम के निरस्त होने के बाद होता है, तो किस कानून के प्रावधान लागू होंगे?
यह मामला आयकर अधिनियम, 1961 द्वारा शासित होगा। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(c), (d) एवं (e) के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से पूर्व प्रारंभ होने वाले किसी कर वर्ष से संबंधित कोई भी कार्यवाही—जिसमें अपील, पुनर्निर्धारण , संशोधन अथवा दंडात्मक कार्यवाही शामिल हैं—उसी प्रकार जारी रहेगी और उसका निस्तारण किया जाएगा, मानो आयकर अधिनियम, 1961 निरस्त ही न किया गया हो। अतः अपीलीय प्राधिकारी कटौती की पात्रता का निर्धारण आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार ही करेगा। हालाँकि, यदि अपीलीय निर्णय का प्रभाव आगामी कर वर्षों पर पड़ता है (उदाहरणार्थ, हानियों के अग्रेषण या अवशोषित न हो सकी मूल्यह्रास राशि की मात्रा को प्रभावित करता है), तो 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होने वाले कर वर्षों के लिए उसका प्रभाव आयकर अधिनियम, 2025 की गणना व्यवस्था के अंतर्गत लागू होगा।
उदाहरण: मान लीजिए कि निर्धारण वर्ष 2025–26 के लिए किसी करदाता ने धारा 80-IA के अंतर्गत ₹10 करोड़ की कटौती का दावा किया था, लेकिन निर्धारण अधिकारी ने उसे घटाकर ₹7 करोड़ कर दिया। इसके विरुद्ध दायर अपील का निर्णय वित्तीय वर्ष 2026–27 (अधिनियम के निरस्त होने के बाद) में पुराने अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है और अपीलीय प्राधिकारी पूर्ण ₹10 करोड़ की कटौती की अनुमति दे देता है। ऐसी स्थिति में, ₹3 करोड़ की अतिरिक्त कटौती अनुमति योग्य थी या नहीं, इस प्रश्न का निर्णय आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
यदि उस निर्णय का प्रभाव कर वर्ष 2026–27 तथा उसके बाद के वर्षों में व्यावसायिक हानि के अग्रेषण या मैट क्रेडिट के अग्रेषण पर पड़ता है, तो ऐसा अग्रेषण धारा 536 के कारण प्रभावी बना रहेगा। तथापि, आगामी वर्षों में उसके उपयोग का निर्धारण आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
20. क्या आयकर अधिनियम, 2025 में सकल कुल आय और कटौती की अधिकतम सीमा के बीच संबंध में कोई परिवर्तन किया गया है?
नहीं, इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80A के अनुसार, अध्याय VI-A के अंतर्गत अनुमेय कटौतियाँ करदाता की सकल कुल आय (जी.टी.आई.) से अधिक नहीं हो सकती थीं। यही सिद्धांत आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 122 में भी जारी रखा गया है। अर्थात्, निर्धारिती को अनुमेय कुल कटौतियाँ उसकी सकल कुल आय से अधिक नहीं हो सकतीं।
21. यदि मार्च 2026 में तलाशी की कार्यवाही प्रारंभ की गई हो और अध्याय VI-A के अंतर्गत किसी कटौती की संवीक्षा की जा रही हो, तो कौन-सा अधिनियम लागू होगा?
आयकर अधिनियम, 1961 लागू होगा। यदि 1 अप्रैल 2026 से पहले तलाशी की कार्यवाही प्रारंभ की गई थी, तो उससे संबंधित संपूर्ण कार्यवाही—जिसमें निर्धारण, पुनर्निर्धारण, दंडात्मक कार्यवाही तथा अपील शामिल हैं—आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत ही जारी रहेगी, भले ही निर्धारण आदेश 01.04.2026 के बाद पारित किया गया हो। यह स्थिति आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(v) में निहित संरक्षण प्रावधान द्वारा स्पष्ट रूप से सुरक्षित की गई है। इसके अनुसार, यदि आयकर अधिनियम, 1 961 की धारा 132 के अंतर्गत तलाशी (अथवा धारा 132A के अंतर्गत अभिग्रहण की कार्यवाही) आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने से पूर्व प्रारंभ की गई थी, तो निरस्त अधिनियम के प्रावधान उसी प्रकार लागू रहेंगे, मानो नया अधिनियम अधिनियमित ही न किया गया हो।
22. यदि निर्धारण वर्ष 2024–25 के लिए धारा 80-IA के अंतर्गत दावा की गई कटौती से संबंधित मामले में, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 263 के सी.आई.टी. द्वारा अधिनियम के निरस्त होने के बाद पुनरीक्षण किया जाता है, तो क्या वह वैध होगा?
हाँ, यह वैध होगा। निर्धारण वर्ष (AY) 2024–25 ऐसा कर वर्ष है जो 1 अप्रैल 2026 से पूर्व प्रारंभ हुआ था। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(c) एवं 536(2)(e) के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से पूर्व के किसी कर वर्ष से संबंधित कोई भी कार्यवाही—जिसमें पुनरीक्षण भी शामिल है—उसी प्रकार जारी रहेगी और उसका निस्तारण किया जाएगा, मानो आयकर अधिनियम, 1961 निरस्त ही न किया गया हो।
23. यदि किसी निर्धारिती ने आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत किसी विशिष्ट कटौती व्यवस्था का विकल्प चुना था, तो क्या वह विकल्प स्वतः ही आयकर अधिनियम, 2025 में स्थानांतरित हो जाएगा?
यह विकल्प केवल तभी जारी रहेगा जब संरक्षण प्रावधान द्वारा उसे विशेष रूप से सुरक्षित किया गया हो। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(f) के अनुसार, आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत किया गया कोई भी निर्वाचन, घोषणा या विकल्प, जो निरसन से ठीक पहले प्रभावी था, उसे आयकर अधिनियम, 2025 के समरूपी प्रावधान के अंतर्गत किया गया माना जाएगा—लेकिन केवल तभी, जब नया अधिनियम ऐसा तदनुरूप प्रावधान प्रदान करता हो। अर्थात्, पुराना विकल्प केवल वहीं तक प्रभावी रहेगा जहाँ नए अधिनियम में उसका समकक्ष प्रावधान मौजूद है। यह किसी स्थायी या स्वतंत्र अधिकार का सृजन नहीं करता।
24. क्या आयकर अधिनियम, 1961 में इकाइयों के बीच अंतरण के माध्यम से पात्र लाभ को कृत्रिम रूप से बढ़ाने से रोकने के लिए जो प्रावधान थे, उन्हें आयकर अधिनियम, 2025 में भी सम्मिलित किया गया है?
हाँ। आयकर अधिनियम, 1961 तथा आयकर अधिनियम, 2025 दोनों में ऐसे समान दुरुपयोग-निरोधक प्रावधान मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य किसी पात्र अंडरटेकिंग के लाभ को इकाइयों के बीच अंतरण के माध्यम से कृत्रिम रूप से बढ़ाने से रोकना है।
25. यदि पुराने अधिनियम के अंतर्गत दावा की गई कटौतियों से संबंधित शर्तों का उल्लंघन नए अधिनियम के लागू होने के बाद किसी अनुवर्ती वर्ष में किया जाता है, तो ऐसी कटौतियों का क्या होगा?
जब पुराने आयकर अधिनियम के अंतर्गत पूर्व वर्षों में प्रदान की गई कोई कटौती कुछ निर्धारित शर्तों के अधीन थी और नए अधिनियम के लागू होने के बाद किसी आगामी वर्ष में उन शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो पहले प्रदान किया गया लाभ वापस ले लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में, पूर्व में कटौती की गई (या कुल आय से बाहर रखी गई) राशि को उल्लंघन वाले वर्ष की आय माना जाएगा तथा नए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उस पर कर लगाया जाएगा।
26. यदि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54 के अंतर्गत छूट का दावा किया गया था और नई परिसंपत्ति का हस्तांतरण 1 अप्रैल 2026 के बाद, किन्तु निर्धारित लॉक-इन अवधि के भीतर किया जाता है, तो आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ऐसी छूट की वापसी पर कराधान किस प्रकार किया जाएगा?
जहाँ आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54, 54B, 54F आदि के अंतर्गत छूट का दावा किया गया था और नई परिसंपत्ति का हस्तांतरण 1 अप्रैल 2026 के बाद, किन्तु निर्धारित लॉक-इन अवधि के भीतर किया जाता है, वहाँ आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(h) लागू होगी। इस प्रावधान के अनुसार, यदि निरस्त अधिनियम के अंतर्गत प्रदान की गई किसी कटौती या छूट से संबंधित शर्तों का उल्लंघन नए अधिनियम के लागू होने के बाद किया जाता है, तो पूर्व में छूट प्राप्त राशि को उल्लंघन वाले वर्ष में करदाता की आय माना जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि पूंजीगत लाभ पर छूट प्राप्त करने हेतु मार्च 2025 में खरीदा गया मकान (नई परिसंपत्ति) मई 2027 में (तीन वर्ष की अवधि के भीतर) बेच दिया जाता है, तो पूर्व में छूट प्राप्त पूंजीगत लाभ पर कर वर्ष 2027–28 में आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत कर लगाया जाएगा। हालांकि, उल्लंघन की शर्त तथा कर योग्य राशि का निर्धारण पुराने अधिनियम की धारा 54 के अनुसार किया जाएगा।
27. आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत पूंजीगत लाभ खाता योजना में 1 अप्रैल 2026 से पूर्व जमा की गई राशि, यदि निर्धारित अवधि के बाद भी अनुपयोजित है, तो उस पर कर किस प्रकार लगाया जाएगा, और क्या ऐसा कराधान पुराने अधिनियम के अंतर्गत होगा या आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत?
यदि किसी करदाता ने 1 अप्रैल 2026 से पूर्व आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत पूंजीगत लाभ खाता योजना में अप्रयुक्त पूंजीगत लाभ जमा किया था, तो ऐसी जमा राशि पर पुराने अधिनियम की शर्तें लागू रहेंगी। यदि निर्धारित अवधि (उदाहरणार्थ, धारा 54 के अंतर्गत तीन वर्ष) के भीतर उस राशि का उपयोग नहीं किया जाता है, तो धारा 536(2)(h) के अनुसार अप्रयुक्त राशि उस वर्ष में कर योग्य होगी, जिसमें निर्धारित समय-सीमा समाप्त होती है। उदाहरण के लिए, यदि परिसंपत्ति का हस्तांतरण जून 2024 में हुआ था और जमा की गई राशि जून 2027 तक भी अप्रयुक्त रहती है, तो वह राशि कर वर्ष 2027–28 में आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत कर योग्य हो जाएगी। तथापि, कर योग्य राशि की गणना पुराने अधिनियम में उपलब्ध छूट की व्यवस्था के अनुसार ही की जाएगी।
28. आयकर अधिनियम, 1961 के निरस्त होने के बाद धारा 47(xiii), 47(xiiib) और 47(xiv) के अंतर्गत निर्धारित शर्तों के उल्लंघन का किस प्रकार उपचार किया जाएगा?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 47(xiii), 47(xiiib) और 47(xiv) के अंतर्गत क्रमशः फर्म का कंपनी में रूपांतरण, कंपनी का एल.एल.पी. में रूपांतरण तथा स्वामित्वाधीन व्यवसाय का कंपनी में रूपांतरण होने पर, निरंतरता एवं शेयरधारिता संबंधी शर्तों के अधीन पूंजीगत लाभ पर छूट प्रदान की जाती थी। यदि इन शर्तों का पालन नहीं किया जाता था, तो धारा 47A के अंतर्गत यह छूट वापस ले ली जाती थी। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(q)(B) के अनुसार, यदि ऐसा अनुपालन न होना 1 अप्रैल 2026 के बाद होता है, तो पूर्व में छूट प्राप्त पूंजीगत लाभ को उल्लंघन वाले वर्ष में आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत कर योग्य माना जाएगा। अतः अधिनियम के निरस्त होने से रूपांतरण के बाद लागू लॉक-इन अवधि अथवा अन्य शर्तों के अनुपालन से संबंधित दायित्व समाप्त नहीं होते।
29. क्या आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 35ABA, 35ABB, 35D, 35DD, 35DDA, 35E अथवा धारा 36(1)(ix) के प्रथम उपबंध के अंतर्गत उपलब्ध बहुवर्षीय कटौतियों—जैसे प्रारंभिक व्यय, दूरसंचार/लाइसेंस शुल्क का कई वर्षों में परिशोधन आदि—की शेष अथवा अप्राप्त कटौतियाँ, आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने के बाद भी दावा की जा सकती हैं?
हाँ। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(s) के अनुसार, ऐसी कटौतियाँ निर्धारित शर्तों की पूर्ति होने पर शेष वर्षों के लिए नए अधिनियम के अंतर्गत भी जारी रहेंगी। उदाहरण के लिए, यदि M/s ABC ने निर्धारण वर्ष 2025–26 से प्रारंभिक व्ययों की कटौती पाँच समान किस्तों में दावा करना शुरू किया था, तो उसे निर्धारण वर्ष 2026–27 तथा उसके बाद के वर्षों में शेष किस्तों की कटौती आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत भी प्राप्त होती रहेगी।
30. यदि किसी दूरसंचार कंपनी ने 01.04.2026 से पूर्व दूरसंचार सेवाओं हेतु स्पेक्ट्रम के उपयोग का अधिकार प्राप्त करने के लिए व्यय किया था और पुराने अधिनियम की धारा 35ABA के अंतर्गत बहुवर्षीय कटौती का दावा करना प्रारंभ कर दिया था, तो क्या नए अधिनियम के लागू होने के बाद वह शेष कटौती का लाभ खो देगी?
नहीं। निर्धारित शर्तों की पूर्ति होने पर ऐसी कटौती नए अधिनियम के अंतर्गत शेष वर्षों के लिए भी जारी रहेगी।
उदाहरण के लिए, XYZ Telecom Ltd. ने वित्तीय वर्ष 2024–25 में लाइसेंस शुल्क का भुगतान किया था और नए अधिनियम के लागू होने से पहले ही दो वर्षों की कटौती का दावा कर लिया था। कर वर्ष 2026–27 से शेष कटौती नए अधिनियम के अंतर्गत स्थगित व्यय की कटौती का हिस्सा मानी जाएगी और कंपनी निर्धारित शर्तों की पूर्ति के अधीन प्रत्येक वर्ष इसका दावा करती रहेगी।
31. क्या वर्ष 2026 से पूर्व के निर्धारण वर्षों की अवशोषित न हो सकी शेष अवक्षयण राशि को आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत भी बिना किसी समय-सीमा के आगे ले जाया जा सकता है?
हाँ। संरक्षण प्रावधान के कारण इसकी प्रकृति तथा समय-सीमा (या समय-सीमा का अभाव) यथावत् बनी रहती है।